अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला है. प्राइज वेनेजुएला की अपोजीशन लीडर मारिया कोरिना मचाडो को मिला है. उन्होंने वेनेज़ुएला के लोगों की स्वतंत्रता के लिए वर्षों तक काम किया है. वेनेज़ुएला में शासन की सत्ता पर कठोर पकड़ और उसके खिलाफ मचाडो का संघर्ष सराहनीय माना गया.
1901 से नोबेल प्राइज दिए जा रहे हैं और 123 साल में सिर्फ 2 भारतीयों को नोबल का पीस प्राइज मिला. एक प्राइज 1979 में मदर टेरेसा को मिला था, क्योंकि वे कोलकाता में गरीब और बीमार लोगों की सेवा करती थीं. उन्होंने 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी भी शुरू की थी. दूसरा प्राइज साल 2014 में कैलाश सत्यार्थी को मलाला यूसुफजई के साथ मिला था, क्योंकि कैलाश ने बच्चों को गुलामी से बचाने के लिए बचपन बचाओ आंदोलन शुरू किया था. वे कारखानों और खदानों से बच्चों को निकालकर स्कूल भेजते थे.
नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में हुई थी और पुरस्कार 1901 से दिए जा रहे हैं. वैज्ञानिक और इन्वेंटर अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल के नाम पर प्राइज दिए जाते हैं, जिनकी शुरुआत फिजिक्स, मेडिसिन, केमिस्ट्री, लिटरेचर और पीस सेक्टर से हुई थी, लेकिन अब इकोनॉमिक्स फील्ड में भी नोबेल प्राइज दिए जाने लगे हैं.
2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की दावेदारी इसलिए भी कमजोर है, क्योंकि उन्होंने बतौर राष्ट्रपति 20 जनवरी 2025 को शपथ ग्रहण किया था और नोबेल प्राइज के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2025 थी. इस तारीख के बाद आए किसी भी नामांकन को स्वीकार नहीं किया जाता.1 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन ट्रंप उस समय तक नामांकन नहीं भर पाए, इसलिए अब उनकी दावेदारी कमजोर पड़ गई, जिस पर अगले साल ही विचार किया जा सकता है.
बता दें कि शांति का नोबेल पुरस्कार साल 1901 से साल 2024 तक 141 बार दिया जा चुका है. 111 व्यक्तियों और 30 संगठनों को यह सम्मान मिला. वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को वर्ष 1937 से वर्ष 1948 तक 5 बार शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था, लेकिन उन्हें पुरस्कार नहीं मिला. महात्मा गांधी वर्ष 1948 में नोबेल पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार थे, लेकिन नॉमिनेशन क्लोज होने से 1 दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गई थी. इसलिए कमेटी ने उस साल किसी को भी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया था.
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने स्पष्ट किया है कि इस बार गाजा शांति समझौते पर विचार नहीं किया जा रहा है. क्योंकि इस समझौते को इस सप्ताह की शुरुआत में ही अंतिम रूप दिया गया था. इसके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पुरस्कार के लिए लॉबिंग कर रहे हैं और सार्वजनिक दावे जारी रखे हुए हैं. गाजा में शांति समझौता देरी से हुआ है, इसलिए इस बार ट्रंप की जीत मुश्किल है. नोबेल कमेटी की निना ग्रेगर ने कहा कि नोबेल के फैसले पर गाजा सीजफायर का असर नहीं होगा, लेकिन अगर यह शांति स्थायी रही तो अगले साल ट्रम्प की दावेदारी मजबूत हो सकती है.
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को इजरायल, पाकिस्तान, अजरबैजान, आर्मेनिया, थाईलैंड और कंबोडिया समेत कई देशों ने नॉमिनेट किया है. उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने 9 महीने में 8 युद्ध रुकवाए हैं, जिसमें सबसे अहम भारत और पाकिस्तान का युद्ध, ईरान और इजरायल का युद्ध और अब इजरायल और हमास का युद्ध है. ट्रंप कई मौकों पर यह दावा कर चुके हैं और वे खुद को अवार्ड का हकदार मानते हैं. उन्होंने नॉर्वे के अधिकारियों को भी इसके लिए फोन किया है.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को शांति का नोबेल अवार्ड साल 2009 में मिला था. वहीं पिछले साल का पुरस्कार निहोन हिडांक्यो को दिया गया था, जिन्होंने जापान में परमाणु बमबारी से बचे लोगों के लिए आंदोलन छेड़ा था, जिन्होंने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल निषेध बनाए रखने के लिए कई दशक तक काम किया.
बता दें कि शांति के नोबेल अवार्ड की घोषणा 5 सदस्यीय नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष जोर्गेन वाटने फ्राइडनेस करेंगे. कमेटी के सदस्य मानवाधिकार अधिवक्ता जोर्गेन वाटने फ्राइडनेस, विदेश नीति विद्वान असले तोजे, पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री ऐनी एंगर, पूर्व शिक्षा मंत्री क्रिस्टिन क्लेमेट और पूर्व विदेश सचिव ग्री लार्सन हैं.
शांति के नोबेल अवार्ड के लिए 338 नॉमिनेशन आए हैं, जिनमें 244 लोग और 94 संगठन हैं. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सबसे चर्चित उम्मीदवार हैं और उनके अलावा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, टेस्ला और स्पेसएक्स के CEO इलॉन मस्क, मलेशिया के PM अनवर इब्राहिम और पोप फ्रांसिस भी नॉमिनेट हैं.
Nobel Peace Prize 2025: साल 2025 के नोबेल शांति पुरस्कारों की घोषणा हो गई है और सभी की नजरें इस पर टिकी थीं कि क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलेगा? लेकिन उन्हें पुरस्कार नहीं मिला. राष्ट्रपति ट्रंप को इस पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था और वे खुद भी इस पुरस्कार को पाने के इच्छुक हैं. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी द्वारा नार्वे की राजधानी ओस्लो में शांति पुरस्कार विजेता के नामों की घोषणा की गई.
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