No Uranium Will Leave Iran: ईरान ने अपने एनरिच यूरेनियम को विदेश भेजने से इनकार कर दिया है और ये साफ कर दिया है कि जब तक वाशिंगटन तेहरान की मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकती. ये ऐलान पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की यात्रा के दौरान की गई, जो दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं.
बातचीत से पहले ईरान ने शर्तें रखीं
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में तेहरान का रुख दोहराते हुए कहा कि देश अपना कोई भी एनरिच यूरेनियम नहीं सौंपेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को ईरान की शर्तें मानकर भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
ईरानी मीडिया आउटलेट ‘नूरन्यूज’ के मुताबिक, मुनीर ने तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ रीजनल घटना और मध्यस्थता के चल रही कोशिशों पर चर्चा की. उन्होंने संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ से भी मुलाकात की. क़ालिबाफ ने कहा कि पिछले महीने ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के लिए रखी गई सात शर्तों को पूरा किए बिना, अमेरिका के लिए तेहरान का भरोसा जीतना मुश्किल होगा. इन मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाना और क्षेत्रीय मोर्चों पर सैन्य टकराव रोकना शामिल है.
न्यूक्लियर प्रोग्राम अभी भी एक बड़ी रुकावट है
यूरेनियम संवर्धन को लेकर असहमति किसी समझौते तक पहुंचने के प्रयासों को जटिल बना रही है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पहले कहा था कि अमेरिका की मांगों को पूरा करने और लंबे समय से चल रहे इस टकराव को खत्म करने के लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमताओं को काफी कम करना होगा.
यह भी पढ़ें- क्या ईरान पर हमला करने वाला है अमेरिका? नेतन्याहू-हेगसेथ की मुलाकात के बाद अटकलें तेज
अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देशों ने ईरान की न्यूक्लियर एक्टिविटीज, खासकर 60 फीसदी तक यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर बार-बार चिंता जताई है. ये लेवल नागरिक परमाणु कार्यों के लिए आमतौर पर जरूरी स्तर से काफी ज्यादा है. हालांकि तेहरान का कहना है कि उसके परमाणु कार्यक्रम का मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है.
पाकिस्तान की कूटनितिक कोशिशें
पाकिस्तान ने खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक मध्यस्थ के रूप में पेश किया है. इससे पहले की कूटनीतिक पहलों के कारण जून में एक अस्थायी शांति समझौता हुआ था, लेकिन बाद में टकराव फिर से शुरू होने के कारण यह समझौता टूट गया. मुनीर की हालिया मुलाकातें दिखाती हैं कि इस्लामाबाद दोनों पक्षों के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, ईरान का अपने एनरिच यूरेनियम को विदेश भेजने से इनकार करना और अमेरिका से पहले ही कुछ रियायतें देने की मांग पर अड़े रहना यह दर्शाता है कि बातचीत फिर से शुरू होने से पहले अभी भी बड़ी रुकावटें मौजूद हैं.
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