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240 वर्षों तक नेपाल था दुनिया का एकमात्र 'हिंदू राष्ट्र', 2008 के बाद ऐसा क्या हुआ, लोगों के बीच फिर उठी 'सनातन देश' की मांग

नवंबर 2023 में दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में काठमांडू में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ, जो बाद में हिंसक हो गया. इसके बाद 2024 में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी काठमांडू समेत कई इलाकों में रैलियां कीं.

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नेपाल में 2008 के बाद से ही जारी 'हिंदू राष्ट्र' की मांग (Photo: AI/News24)

नेपाल में एक बार फिर देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग तेज हो गई है. काठमांडू से लेकर देश के दूसरे हिस्सों में हिंदू संगठनों और राजशाही समर्थकों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करीब 240 वर्षों तक हिंदू राजशाही के अधीन रहे नेपाल ने 2008 में राजशाही परंपरा को खत्म कर संविधान अपनाया और खुद को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया. अब हिंदू संगठनों के साथ-साथ कुछ राजनीतिक दल भी पुरानी परंपरा की वापसी की मांग कर रहे हैं.

नेपाल की 82 फीसदी आबादी हिंदू

इतिहासकारों के मुताबिक नेपाल के आधुनिक राजनीतिक इतिहास की शुरुआत 1768 में राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा अलग-अलग रियासतों को एकजुट कर आधुनिक नेपाल की नींव रखने से मानी जाती है. राजशाही के दौर में दुनिया में नेपाल की आधिकारिक पहचान एक ‘हिंदू राष्ट्र’ के तौर पर थी, लेकिन 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद नेपाल धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र बन गया. 2022 की जनगणना के मुताबिक नेपाल की करीब 81.19 प्रतिशत आबादी हिंदू है. इसी आंकड़े के तहत अब प्रदर्शनकारी हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: नेपाल में जनरल धीरज सेठ को मिलेगा मानद जनरल का सम्मान, गोरखा भर्ती पर भी नजर

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क्यों नेपाल को घोषित किया जाना चाहिए हिंदू राष्ट्र?

हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों का कहना है कि नेपाल की पहचान उसकी सनातन परंपरा से जुड़ी रही है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंटरनेशनल की सचिव अस्मिता भंडारी का कहना है कि नेपाल की पुरानी संस्कृति और पहचान हिंदू राजशाही से जुड़ी रही है. वहीं राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता दीपक भंडारी का तर्क है कि जब देश की करीब 82 प्रतिशत आबादी हिंदू है, तो नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए.

2008 के बाद से ही जारी ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग

2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद भी धर्मनिरपेक्षता को लेकर असहमति बनी रही. 2015 में नया संविधान तैयार होने के दौरान भी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और हिंदू संगठनों ने नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए देशव्यापी प्रदर्शन किए थे. लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच सहमति के बाद संविधान में धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था बरकरार रखी गई. इसके बाद भी आंदोलन आज तक लगातार जारी रहे. नवंबर 2023 में दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में काठमांडू में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ, जो बाद में हिंसक हो गया. इसके बाद 2024 में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी काठमांडू समेत कई इलाकों में रैलियां कीं.

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यह भी पढ़ें: ‘भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती चाहिए, खाड़ी देशों की नौकरी नहीं’, नेपाल में फिर उबाल, अब Ex गोरखाओं ने किया प्रदर्शन

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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