भारत के पड़ोसी देश नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा ने भयंकर तबाही मचाई है. 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे तिब्बत में ग्लेशियर फटने और नेपाल में पहाड़ी इलाकों में भूकंप आने से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आ गई. पहाड़ों से इतनी भारी मात्रा में पानी और मलबा आया कि नेपाल-चीन-तिब्बत बॉर्डर पर बसा रासुवा गांव बह गया. पूरे गांव में अब पानी, मलबा और दलदल है. अब तक 160 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं. वहीं 750 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे. लापता लोगों में 37 NRI भी शामिल हैं.

नेपाल में बाढ़ आने से UP-बिहार में हाई अलर्ट

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य लापता हैं. वहीं कोलकाता का 32 सदस्यीय तीर्थयात्री समूह भी संपर्क से बाहर है. बाढ़ से नेपाल के रासुवा इलाके में बने 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं. 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है. वहीं नेपाल में आई बाढ़ से भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में हाई अलर्ट है. क्योंकि गंडक, नारायणी और कोसी नदी उफान पर बह रही हैं. उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के 6 जिलों में संवेदनशील इलाकों की सीधे गृह मंत्रालय से मॉनिटरिंग हो रही है और सतर्कता बरतने के निर्देश हैं.

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राहत के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर

नेपाल त्रासदी में फंसे लोगों के लिए भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. आपदा में फंसे भारतीय इन 2 नंबरों 79851316807, 79709107500 पर कॉल करके मदद मांग सकते हैं. उत्तर प्रदेश ने 1070 हेल्पलाइन भी एक्टिव कर दी है. महाराष्ट्र ने लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है. चीन के बीजिंग में खुले भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है. इसके अलावा नेपाल पर्यटन बोर्ड ने हेल्पलाइन नंबर 1234 (टोल फ्री), 1144 (हॉटलाइन) जारी की है. नेपाल पर्यटन पुलिस का नंबर 9851289445 है.

भारत सरकार ने भी मदद के लिए बढ़ाया हाथ

बता दें कि पड़ोसी देश की मदद करने के लिए भारत सरकार ने सबसे पहले हाथ बढ़ाया. बीती रात ही भारतीय वायु सेना का C-130J एयरक्राफ्ट आपातकालीन सामान और राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच गया है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मची तबाही पर दुख व्यक्त किया है. भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और अचानक आई प्राकृतिक आपदा पर संवेदना व्यक्त की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस मुश्किल की घड़ी में भारत के लोग नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं.

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सेना और पुलिस बचाव-राहत कार्यों में तैनात

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया कि नेपाल की सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवान आपदा प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों में तैनात हैं. नेपाली सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं. सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया है. रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों स्याप्रु बेसी और तिमुरे में हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाए. इसलिए इस जिले के करीब 50000 लोगों की सुरक्षा खतरे में है. नेपाल सेना ने त्रिशूली में मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर-1 में मेडिकल सेंटर खोल दिया है. सेना का MI-17 हेलीकॉप्टर त्रिशूली के जिला अस्पताल में तैनात है.

लापता लोगों में भारत समेत कई देशों के लोग

नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि लापता लोगों में 265 लोग चीन के हैं. 133 भारतीय और 37 NRI हैं. 37 लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं. 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर के तीर्थ यात्री थे. ईशा फाउंडेशन सेंटर के 77 लोग लापता है, जबकि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं. नेपाली सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के अनुसार, लापता लोगों में अमेरिका के 3 और ब्रिटेन के 12 पर्यटकों के अलावा मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, नीदरलैंड समेत 20 से ज्यादा देशों के लोग भी शामिल हैं, जिनके सलामत होने की उम्मीद है.

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निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में 354 मेगावाट क्षमता वाली 8 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और 5 निर्माणाधीन प्रोजेक्ट डैमेज हुए हैं. इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (IPPAN) के अनुसार, रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) को नुकसान पहुंचा है. वहीं एक से दूसरे इलाके में जाने के लिए बनाए गए 19 पुल बह गए हैं. नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई है.

उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग ने बताया कि बाढ़ से स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत 10 से ज्यादा बस्तियां बह गई हैं.

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