Nepal Flash Floods: उत्तरी नेपाल में तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. बुधवार सुबह रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भोटे कोशी नदी का जलस्तर सुबह करीब 9 बजे अचानक तेजी से बढ़ गया. बताया जा रहा है कि पानी का यह तेज बहाव तिब्बत की ओर से आया, जिसने देखते ही देखते रिहायशी इलाकों और ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया.जिसने देखते ही देखते रिहायशी बस्तियों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को अपनी चपेट में ले लिया. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक 105 भारतीय नागरिकों समेत कई लोग लापता बताए जा रहे हैं.
टिमुरे और स्याफ्रुबेसी में सबसे ज्यादा असर
बाढ़ का सबसे घातक असर रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में हुआ है. पानी का सैलाब इतना तेज था कि कस्टम ऑफिस में खड़े वाहन और सामान ताश के पत्तों की तरह बह गए. इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट और धादिंग के निचले इलाकों में फैल गया. कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, संपर्क टूटने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई है.
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सेना और पुलिस का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को तत्काल राहत कार्य में लगाया गया है. प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर, अतिरिक्त एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीमें भेजी गई हैं. प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद बिहार में मंडराया खतरा
नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश और भोटे कोशी नदी में आए भयानक उफान के बाद बिहार सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. राज्य में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक आपातकालीन हाईलेवल बैठक बुलाई है. मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को 24 घंटे हालात पर लगातार नजर बनाए रखने का कड़ा निर्देश दिया है. उन्होंने मुख्य सचिव को सीधे तौर पर पूरी स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे खुद ग्राउंड जीरो पर जाकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई या स्थलीय दौरा करेंगे.
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