Mirza Fakhrul Islam Alamgir Wins Presidential Poll In Bangladesh: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को संसदीय चुनाव में 255 वोट मिलने के बाद बांग्लादेश का 23वां राष्ट्रपति चुना गया है. उनके विरोधी ओली अहमद को 11 पार्टियों के गठबंधन का समर्थन हासिल था, लेकिन उन्हे महज 88 वोट हासिल हुए.

संसद में चुनाव का आयोजन

चीफ इलेक्शन कमिश्नर एएमएम नासिर उद्दीन ने वोटिंग प्रॉसेस पूरा होने के बाद गुरुवार, 20 अगस्त 2026 की दोपहर नतीजों का ऐलान किया. नेशनल पार्लियामेंट भवन के सेशन हॉल में दोपहर करीब 2 बजे मतदान शुरू हुआ. कार्यवाहक राष्ट्रपति हाफिज उद्दीन अहमद बीर बिक्रम ने पहला वोट डाला. डिप्टी स्पीकर बैरिस्टर कैसर कमाल, पीएम तारिक रहमान और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी मतदान में हिस्सा लिया. BNP सांसद मिर्जा अब्बास मतदान नहीं कर सके क्योंकि उनका इलाज चल रहा था.

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35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला

चुनाव की देखरेख मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने की, जिन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के तौर पर काम किया. चुनाव आयोग और संसद सचिवालय के अधिकारियों ने कार्यवाही में मदद की. बांग्लादेश में पिछली बार 8 अक्टूबर 1991 को राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हुआ था. 1996, 2001, 2002, 2009, 2013, 2018 और 2023 में हुए राष्ट्रपति चुनावों में मतदान की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि मैदान में सिर्फ एक ही उम्मीदवार था.

(Photo-X/@BNPSGOffice)

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संसद में बीएनपी के दो-तिहाई बहुमत के कारण फखरुल की जीत की उम्मीद पहले से ही थी. हालांकि सभी का ध्यान फाइनल वोट और विपक्षी उम्मीदवार की परफॉर्मेंस पर रहा. सत्ताधारी पार्टी के चीफ व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 शाम 7:30 बजे बंगभवन में शपथ लेंगे.

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम?

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं और मिनिस्टर ऑफ लोकल गर्वनमेंट के तौर पर काम कर रहे हैं. 2001 से 2006 तक सरकार में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कृषि राज्य मंत्री के तौर पर काम किया और बाद में नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय में भी इसी पद पर रहे.

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भारत में भी ली थी शरण

1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाई थी. आजादी के उस दौर में उन्होंने कुछ वक्त के लिए भारत में भी शरण ली थी. राजनीति में आने से पहले उनका करियर शिक्षा और सरकारी सेवा से जुड़ा रहा. उन्होंने 1972 में इकॉनी के टीचर के तौर पर अपने प्रोफेशनल लाइफ की शुरुआत की थी. करीब 14 साल तक एकेडमिक्स में काम करने के बाद 1986 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और एक्टिव पॉलिटिक्स में एंट्री कर ली.

वाइफ ने कोलकाता से की पढ़ाई

मिर्जा फखरुल इस्लाम का जन्म 26 जनवरी 1948 को ठाकुरगांव जिले में हुआ था. उनके पिता मिर्जा रूहुल अमीन पूर्व सांसद थे और मां मिर्जा फातिमा अमीन हाउस वाइफ थीं. आलमगीर की पत्नी राहत आरा बेगम हैं, जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता से पढ़ाई की है और ढाका में एक बीमा कंपनी में काम करती हैं. इस कपल की 2 बेटियां हैं - डॉ. शमरुह मिर्जा और मिर्जा सफारुह.

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कर्नल ओली अहमद कौन हैं?

राष्ट्रपति चुनाव हारने वाले कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद बांग्लादेश के एक दिग्गज राजनेता और एलडीपी के मौजूदा अध्यक्ष हैं. 30 सितंबर 1941 को उनका जन्म हुआ, उन्होंने पहले BNP राजनेता और सांसद के तौर पर काम किया है और कई मंत्री पद संभाले हैं. ओली ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ी और उन्हें BNP के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक माना जाता है. उन्होंने अक्टूबर 2006 में कई सीनियर नेताओं के साथ पार्टी छोड़ दी और LDP की स्थापना में मदद की, जिसके वे अभी भी अध्यक्ष हैं.

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