मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के वार जोन में नया हथियार नजर आया। अमेरिकी नौसेना ने इस हथियार से ईरान के बंदर अब्बास में नेवल बेस पर तबाही मचाई। अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमले का वीडियो शेयर किया और बताया कि अमेरिकी नौसेना ने पहली बार युद्धक्षेत्र में सुसाइड सी-ड्रोन कोर्सेयर (Corsair) का इस्तेमाल किया, जो समंदर की दुनिया का जल्लाद साबित हुआ। इस ड्रोन से ईरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदर अब्बास में हमला किया गया था।
बिना पायलट वाले सबसे छोटे युद्धपोत
सुसाइड सी-ड्रोन कोर्सेयर की आर्मी अमेरिकी नौसेना बल केंद्रीय कमान (NAVCENT) और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के टास्क फोर्स 59 के नेतृत्व में तैनात है। इसे अमेरिका ने नेवी के सबसे छोटे युद्धपोत नाम दिया है, जिनके लिए न पायलट की जरूरत है और न ही इसे लॉन्चर-मिसाइलों से लैस करने की जरूरत है। बल्कि अपने पेलोड के साथ यह रोबोटिक ड्रोन सीधे दुश्मन के युद्धपोत से टकराकर उसे ध्वस्त कर देगा। मिडिल ईस्ट वार में यह समुद्र में शिप और सबमरीन का काल बनकर उभरा है।
खतरनाक स्पीड और पेलोड बड़ी ताकत
कोर्सेयर समुद्र की लहरों को चीरते हुए 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करने वाला घातक हथियार है, जिसकी भनक जब तक दुश्मन के रडार को लगती है, तब तक वह तबाही मचा चुका होता है। 1850 किलोमीटर की अचूक रेंज इसे दुश्मन का काल बनाती है। 450 किलोग्राम पेलोड के साथ मानवरहित आत्मघाती युद्धपोत समुद्र में मंडराती मौत है। बंदर अब्बास में तबाही मचाकर इसने साबित कर दिया यह विशालकाय युद्धपोतों और सबमरीन को समुद्र में डुबो सकता है।
जासूसी या रेकी नहीं आत्मघाती हथियार
कोर्सेयर समंदर में सबसे खामोश शिकारी और साइज में बेहद छोटा है। समुद्र की सतह से सटकर चलने वाले इस युद्धपोत को पकड़ने में दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम और रडार नाकाम रहते हैं। जासूसी या रेकी ड्रोन नहीं, आत्मघाती हथियार है। वहीं इसके अंदर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए एडवांस्ड GPS एंटी-जैमिंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। इससे अगर दुश्मन इसके सिग्नल ब्लॉक करने का प्रयास करता है तो अपने AI कैमरे की मदद से यह सटीक निशाना लगाता है।
Explainer: ईरान-इजरायल नहीं, इस देश के पास है दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन
जवानों की जिंदगी और करोड़ो डॉलर बचाए
दुनियाभर के देशों की नौसेना अब तक करोड़ों डॉलर के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर या फाइटर जेट्स से तबाही मचाती आई है। जिनके तबाह होने पर बड़ा आर्थिक नुकसान होता था और पायलटों की जान को भी खतरा था, लेकिन यूक्रेन ने सबसे पहले इस तरह के ड्रोन इस्तेमाल करके करोड़ों डॉलर बचा लिए। 35 से 50 हजार डॉलर की लागत से बनने वाले सी-ड्रोन कोर्सेयर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में दुश्मन पर हमला करके अमेरिकी नौसेना के जवानों की जिंदगी भी बचाई है।
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