मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. उज्बेकिस्तान में हुए SCO समिट में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से मुलाकात की थी. इस मीटिंग से अमेरिका टेंशन में आ गया और ट्रंप के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान जारी किया. PM मोदी-पेजेश्कियान की मुलाकात के बाद मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-ईरान में व्यापार समझौता होने से इनकार किया और दुनियाभर के देशों को चेतावनी दी कि जो देश व्यापार समझौता करके ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करेगा, उस देश को अमेरिका के प्रतिबंध झेलने होंगे.
भारत समेत कई देश मिडिल ईस्ट में शांति चाहते
बता दें कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच व्यापार, अमेरिका के साथ युद्ध, चाबहार पोर्ट और खाड़ी देशों में शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की. क्योंकि अमेरिका और ईरान की जंग 7वें आसमान पर है. भारत समेत कई देश अरब देशों में शांति चाहते हैं, इस पर चर्चा के लिए PM मोदी ने पेजेश्कियान से मुलाकात की. लेकिन जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया तो उनके जवाब ने चौंका दिया. उन्होंने बिना नाम लिए भारत और अन्य देशों को चेतावनी दी कि वे ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करें.
व्यापार करके ईरान की मदद न करने की चेतावनी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश साफ हैं. उनका कहना है कि कोई भी देश ईरान को अमेरिका के प्रतिबंधों से बचाने की कोशिश न करे. कोई देश ईरान की उस तरीके से मदद न करे, जिस तरीके से ईरान की कमाई हो, क्योंकि उस कमाई का इस्तेमाल ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने में करेगा. भारत के ईरान के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं और अगर भारत इन्हें बनाए रखना चाहता है तो उसे ईरान को अमेरिका की शर्तें मानने और परमाणु समझौता करने के लिए मनाना चाहिए.
युद्ध के बाद दोनों देशों की पहली द्विपक्षीय बैठक
बता दें कि सोमवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई. फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के साथ जंग शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय बैठक थी. बैठक में भारत ने ईरान के साथ अपने व्यापार को बढ़ाना और उसमें विविधता लाने की इच्छा जताई. मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति के प्रयासों को भारत के समर्थन का संकल्प दोहराया. पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि भारत सरकार युद्ध में शामिल देशों के साथ अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके बातचीत को बढ़ावा दे, ताकि जंग को खत्म किया जा सके.
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