अमेरिका और ईरान के बीच अभी दो दिन पहले ही हुआ शांति समझौता एक बार फिर से खतरे में पड़ता हुआ नजर आ रहा है. एक तरफ जहां इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में रातभर भीषण बमबारी की है, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है. वहीं दूसरी तरफ, स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की बेहद महत्वपूर्ण शांति वार्ता को टाल दिया गया है.

फ्रांस में हुआ था शांति समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में बुधवार को ही वर्साय के महल (फ्रांस) में अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती शांति समझौता हुआ था. इसका मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को रोकना था. इस समझौते में साफ कहा गया था कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकी जाएगी.

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इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर किए रातभर हमले

बता दें कि इस समझौते के बाद ही इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए. इजरायल के प्रधानमत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता है, इजरायली सेना लेबनान में ही रहेगी.

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क्यों टली जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड की यात्रा

बता दें कि 14 सूत्रीय शुरुआती समझौते को एक स्थायी शांति का रूप देने के लिए शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेस्टॉक रिसॉर्ट में दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत होनी थी. लेकिन यह बैठक रद्द हो गई. बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत की अगुवाई करने वाले थे लेकिन उन्होंने अपना स्विट्जरलैंड का दौरा रद्द कर दिया है.

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व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस ने इसके पीछे 'लॉजिस्टिक्स' यानी व्यवस्था संबंधी दिक्कतों का हवाला दिया है. लेकिन हिजबुल्लाह समर्थक मीडिया 'अल-मायादीन' के मुताबिक, ईरान ने लेबनान पर इजरायल के लगातार हो रहे हमलों के विरोध में अपने प्रतिनिधिमंडल को स्विट्जरलैंड भेजने से मना कर दिया है.

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जेडी वेंस ने इजरायल को दी चेतावनी

समझौते के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को बहुत सख्त और दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इजरायल देश के प्रति हमदर्दी रखते हैं. वेंस का यह बयान साफ करता है कि अमेरिका अब इजरायल के आक्रामक रुख से खुश नहीं है.

बीच में लटका शांति समझौता?

बीते बुधवार को हुए समझौते के तहत कम से कम 60 दिनों के लिए सीजफायर बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन इजरायल के ताजा हमलों और बातचीत के टलने से यह समझौता पूरी तरह अधर में लटक गया है. अगर लेबनान में जंग नहीं रुकी, तो पूरी दुनिया को शांति की उम्मीद देने वाली यह बड़ी कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह फेल हो सकती है.