Khamenei Death Impact ईरानी सुप्रीम लीडर सुप्रीम अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. 47 साल पुराने इस्लामिक शासन का अंत हुआ है. ईरान भी खामोश नहीं बैठेगा वो पलटवार करेगा. इससे अमेरिका और इजरायल में तनाव और बढ़ेगा. ईरान ने इजरायल पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है. ईरान ने इजरायल पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है. अब ईरान में अमेरिका-समर्थित सरकार के आने की संभावना है, जो ईरान के प्रभाव को कमजोर करेगी. वहीं, इजरायल क्षेत्रीय सुपर पावर के रूप में उभरेगा.

'ट्रिपल H' क्या है और क्यों मंडरा रहा खतरा?

ईरान ने दशकों से हमास, हिजबुल्ला और हूती विद्रोहियों को हथियार और पैसा देकर इजरायल के खिलाफ एक 'रिंग ऑफ फायर' तैयार की है. हमास फिलिस्तीन में सक्रिय हैं और इन्हें इजरायल पर हमलों के लिए जाना जाता है. ईरान के बिना इसका वर्चस्व घटेगा. हिजबुल्लाह की लेबनान में मजबूत पकड़ है और यह इजरायल के लिए लगातार सिरदर्द बने हुए हैं. अब ये संगठन अस्थिर हो सकता है. हूती यमन में विद्रोही हैं, जिनके जरिए ईरान ने क्षेत्र पर होल्ड बनाया. इनकी ताकत कम होने से यमन का कंट्रोल बदल सकता है. खामेनेई की मौत से ये समूह कमजोर होंगे, क्योंकि इनका मुख्य समर्थन ईरान की सेना और फंडिंग से आता है.

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सबसे बड़ा फायदा इजरायल को

इस्लामिक शासन के अंत का सीधा फायदा इजरायल को पहुंचाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता मिल सकती है, जो अमेरिका-समर्थित सरकार बनाएंगे. पहले से अमेरिका के सहयोगी मुस्लिम देश सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर इजरायल के करीब आ चुके हैं. अब्राहम अकॉर्ड के जरिए इजरायल कई मुस्लिम देशों के साथ रिश्ते मजबूत कर चुका है. ईरान का खुला विरोध खत्म होने से कम मुस्लिम देश इजरायल के खिलाफ रहेंगे, इससे इजरायल का वर्चस्व बढ़ेगा, और मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल गठजोड़ और मजबूत होगा. क्षेत्रीय संतुलन इजरायल के पक्ष में झुक जाएगा.

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