वोट पाने के लिए महिला प्रत्याशी ने उतार दिए कपड़े! वीडियो देखने वालों से पूछा ये 'सवाल'

Japan Election Candidate Strips In Video: चुनाव जीतने के लिए नेता मतदाताओं को उपहार देने से लेकर धमकाने तक का रास्ता अपना लेते हैं। लेकिन जापान की एक महिला नेता ने अलग ही रास्ता अख्तियार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस महिला प्रत्याशी ने नेशनल टेलीविजन पर अपने चुनाव प्रचार के दौरान अपने कपड़े उतार दिए।

Japan Candidate Airi Uchiko Viral Video Screenshot

Japan Candidate Airi Uchiko Viral Video Screenshot

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Japanese Political Candidate Strips To Win Votes : अब समय ऐसा है जब राजनीति में शामिल लोगों का कोई भरोसा नहीं रह गया है। वोट पाने के लिए नेता कुछ भी कर गुजरते हैं। इसी कड़ी में अब नाम आया है जापान की एक महिला नेता का जिन्होंने वोट पाने के लिए शर्म की सारी हदें पार कर दीं। जापान की राजधानी टोक्यो में हो रहे एक चुनाव में प्रत्याशी इस महिला ने वोट पाने के लिए नेशनल टेलीविजन पर कपड़े उतार दिए। इस रिपोर्ट में समझिए पूरा मामला।

इस अनोखी प्रत्याशी की पहचान एनएचके पार्टी की उम्मीदवार एयरी उचिनो के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार अपनी चुनावी कैंपेन को प्रमोट करने वाले एक अजीबोगरीब वीडियो में उचिको अपने कपड़े उतारते नजर आईं। इस दौरान व्यूअर्स से उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मैं इतनी सेक्सी हूं कि वोट जीत सकूं? उनका यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह बटन अप शर्ट पहने एक टेबल पर बैठी नजर आती हैं।

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पॉलिटिल स्टंट का हो रहा विरोध

वीडियो में वह एनिमे स्टायल की आवाज में जापानी मतदाताओं से बात करती हैं। इसके बाद वह अपने कपड़े उतारने शुरू कर देती हैं। वीडियो के अंत में उनके शरीर पर केवल एक रिवीलिंग ट्यूब टॉप बचता है। इसके बाद वह इस तरह पोज देती हैं मानो टॉपलेस हों। वह अपने वीडियो में कहती हैं, ‘मैं बहुत क्यूट हूं। प्लीज मेरा कैंपेन ब्रॉडकास्ट देखिए। क्या आपको लगता है कि मैं सेक्सी हूं?’ उनके इस पॉलिटिकल स्टंट की आलोचना भी हो रही है। कई लोगों ने इसका विरोध भी किया है।

सोशल मीडिया पर उचिको के वीडियो पर रिएक्ट करते हुए एक यूजर ने लिका कि ये सच है कि लोग अलग दिखने की कोशिश करते हैं। समय के साथ इस तरह के लोगों की सच्चाई सामने आनी तय है। एक अन्य यूजर ने कमेंट किया कि अब ऐसा समय आ गया है कि नियम बदलने जरूरी हो गए हैं। अब दौड़ असली मुद्दों से भटक चुकी है। एक और यूजर ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप चुनावों में फ्रीडम ऑफ स्पीच की कितनी बात करते हैं। यह जनता के हित के खिलाफ है।

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