ईरान के साथ जंग के बीच बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल का रक्षा बजट दोगुना करने जा रहे हैं. 30 मार्च 2026 सोमवार की सुबह ही इजरायली संसद क्नेसेट में बजट को लेकर वोटिंग हुई. मिली जानकारी के अनुसार, अब इजरायल अपना कुल बजट बढ़ाकर 271 अरब डॉलर करने जा रहा है, जिसका करीब एक चौथाई हिस्सा नेतन्याहू सरकार डिफेंस पर खर्च करेगी. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा सांसदों ने बजट के पक्ष में वोट किया है. 55-62 सांसदों ने बजट का समर्थन किया है.

बता दें कि ईरान के इजरायल की जंग को आज पूरा एक महीना हो चुका है, लेकिन अब भी दोनों देशों में से कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं, इजरायल-ईरान ने एक दूसरे पर लगातार हमले जारी रखे हैं. इसके अलावा इजरायल ईरान के न्यूक्यिलयर ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है. इतना ही नहीं पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई सहित 48 ईरानी नेता और 40 कमांडर इजरायली हमलों में मारे गए हैं.

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कितना है इजरायल का रक्षा बजट?

इजरायल का रक्षा बजट पिछले डिफेंस बजट से अब करीब दोगुना है. साल 2023 में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने 27.5 अरब डॉलर का रक्षा बजट रखा था, जो इस बार बढ़ाकर 45 अरब डॉलर कर दिया है. इजरायल इस वक्त सिर्फ ईरान के साथ ही नहीं, बल्कि हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे चरमपंथी संगठनों के साथ भी उलझा हुआ है, ये संगठन ईरान की मदद कर रहे हैं. ऐसे में उसे इन तीनों से मुकाबला करने के लिए अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की जरूरत है और बजट में किया गया इजाफा भी इसी ओर इशारा कर रहा है.

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इजरायली वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच ने रक्षा बजट को वॉरटाइम बजट का मुख्य हिस्सा बताया है. उन्होंने कहा कि इस वक्त इजरायल का मकसद अपनी भूराजनीतिक और राजनयिक स्थिति में सुधार करना है. विपक्ष ने आखिरी समय में किए गए इन बदलावों का विरोध किया है और कहा कि ऐसी हरकत इजरायल के इतिहास में पहली बार हुई है.

वहीं इजरायल में विपक्ष के नेता याइर लैपिड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया और मौजूदा सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'ये चोरों का एक समूह है, जिन्हें जनता से कोई लेना-देना नहीं है. ये ईरान के साथ जंग की वजह से बॉम्ब शेल्टर में जी रहे नागरिकों को लूट रहे हैं.'

दूसरी ओर, इजरायली वित्त मंत्री ने कहा, 'हम राइट-विंग सरकार के तहत यह बजट पास कर रहे हैं. हमारी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और न्यायिक तंत्र में सुधार के अपने लक्ष्यों को पूरा करेगी.'