Bahrain पर ईरानी मिसाइल सबसे ज्यादा बार चलाये गए हैं. किसी Airbase या सैन्य ठिकाने पर नहीं बल्कि नागरिक ठिकानों पर. आज ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के निशाने पर Bahrain Petroleum Company रही. दुनिया के तेल बाज़ार पर इसका व्यापक असर देखा जायेगा.
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अराघची ने कहा कि “इजरायल फर्स्ट” का मतलब हमेशा “अमेरिका लास्ट” होता है. उन्होंने कहा, “एक अनोखे समझौते का मौका जल गया जब ‘अमेरिका लास्ट’ गुट ने हमारी बातचीत में हुई उल्लेखनीय प्रगति को छिपा दिया. मिस्टर राष्ट्रपति, योजना A और साफ सैन्य जीत नाकाम रही. आपकी योजना बी इससे भी बड़ा नाकामी साबित होगी. सच्चाई यह है कि समझौते का अनूठा अवसर नष्ट हो गया, जब ‘अमेरिका लास्ट’ लॉबी ने हमारी वार्ता में बनी महत्वपूर्ण प्रगति को ढक दिया. ‘इजरायल फर्स्ट’ का मतलब हमेशा ‘अमेरिका लास्ट’ ही होता है.
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पश्चिम एशिया संकट और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर इटली के विशेष दूत फ्रांसेस्को एम तालो ने कहा, ‘हमें विविधीकरण की आवश्यकता है क्योंकि किसी भी मार्ग पर कहीं भी समस्या हो सकती है और तब दूसरा विकल्प होना अच्छा है. साझेदारों के साथ भी यही बात लागू होती है. जितने अधिक साझेदार, उतना ही बेहतर. इटली में हम त्रिएस्ते बंदरगाह की पेशकश करते हैं, जो भूमध्यसागर का सबसे उत्तरी बंदरगाह है और मध्य यूरोप, जर्मनी तथा उत्तरी इटली के बड़े बाजारों के सबसे निकट स्थित है. यह वास्तव में एक महत्वपूर्ण स्थान है जहां एक साथ निवेश किया जा सकता है, साथ ही निश्चित रूप से भारत में आप जो महान परियोजनाएं विकसित कर रहे हैं और मध्य पूर्व में जो हो रहा है, उसके साथ भी.’
अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान संघर्ष पर यूक्रेनी सांसद स्वियातोस्लाव युराश कहते हैं, “मुझे उस शासन के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है जो अपने ही हजारों लोगों को मार डालता है जो विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और एक अलग जीवन की अपनी इच्छा व्यक्त कर रहे थे. यूक्रेन और दुनिया के साथ उसने जो किया वह भी उल्लेखनीय है. यूक्रेन को उनके शाहेद ड्रोन से बहुत नुकसान हुआ है. वे हमारे शहरों, हमारे बुनियादी ढांचे, हमारी जल आपूर्ति और हमारे लोगों पर हमला कर रहे थे. इसलिए, हमें तेहरान के शासन के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है…”
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पश्चिम एशिया संघर्ष पर स्लोवेनिया गणराज्य के राजदूत तोमाज मेनसिन ने कहा, ईरानी शासन पर हमला होना अप्रत्याशित नहीं था… मुझे विश्वास है कि हमारे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, विशेषकर क्षेत्रीय साझेदारों के समर्थन से स्थिति को स्थिर किया जा सकता है. हम इस क्षेत्र से आने वाले ईंधन जैसी वस्तुओं पर भी उचित चर्चा करने पर सहमत होंगे, और हमें इन संघर्षों से नुकसान नहीं उठाना चाहिए.’
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, ‘डब्ल्यूएचओ ईरान और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता में है, जिसमें 16 देश प्रभावित हो चुके हैं. अब तक ईरान में करीब 1000 मौतें दर्ज की गई हैं, लेबनान में 50, इजरायल में 13 और अन्य खाड़ी देशों में 11. इसके अलावा, डब्ल्यूएचओ ने ईरान में स्वास्थ्य सेवाओं पर 13 हमले और लेबनान में एक हमले की पुष्टि की है. अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को संरक्षित रखना अनिवार्य है और उन पर हमला नहीं किया जा सकता. संघर्ष से बड़े पैमाने पर विस्थापन भी हो रहा है. अब तक अनुमानित 1 लाख लोग ईरान छोड़ चुके हैं, लेबनान में 60 हजार से अधिक विस्थापित हुए हैं, और निकासी आदेशों के बाद कम से कम 10 लाख लोग विस्थापित होने की कगार पर हैं. परमाणु संयंत्रों पर प्रभाव का खतरा भी चिंताजनक है. परमाणु सुरक्षा में कोई समझौता सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है. डब्ल्यूएचओ प्रभावित देशों में अपने कार्यालयों के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव की निगरानी कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्रदान करने को तैयार है.’
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लिथुआनिया के सांसद और नाटो संसदीय सभा में सेइमास प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख, ऑड्रोनियस अजुबालिस ने कहा, ‘मैं ईरान में चल रहे अभियान और यूक्रेन में जारी आक्रामक युद्ध की तुलना नहीं करूंगा… हम इन दोनों सशस्त्र संघर्षों की तुलना नहीं कर सकते क्योंकि यहां अमेरिका आतंकवादियों से लड़ रहा है. यूक्रेन में, रूस एक ऐसे कानूनी संप्रभु राज्य से लड़ रहा है जिस पर रूस ने बिना किसी कारण के आक्रमण किया है… हम यूरोपीय देशों को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जारी रहने और यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को मुख्य रूप से अमेरिका से हथियार आपूर्ति किए जाने को लेकर थोड़ा चिंतित हैं…’
अमेरिका और इजरायल के साथ जंग में ईरान में मरने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ताजा जानकारी के मुताबिक ईरान में चल रहे युद्ध से अब तक 1230 लोगों की जान जा चुकी है.
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रान के Imam Ali Missile Base पर इजरायल और अमेरिका का हवाई हमला. यह बेस केरमानशाह में स्थित है और यहां शाहब-3 बैलिस्टिक मिसाइलें संग्रहीत हैं. इमाम अली बेस IRGC की अल हदीद 7वीं मिसाइल ब्रिगेड और अल तौहीद 23वीं मिसाइल ब्रिगेड का केंद्र है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने अपना झंडा आधा झुका दिया है. उनकी मृत्यु इजरायल और अमेरिका के हमलों में हुई. भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की.
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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर इटली के पूर्व विदेश मंत्री जियानी वर्नेटी ने कहा, ‘यह युद्ध अचानक नहीं हुआ. ईरान पिछले 20 वर्षों से अवैध परमाणु संवर्धन कार्यक्रम चला रहा है… ईरान ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और अस्थिरता फैलाई है… इन दिनों एक दिलचस्प विकल्प यह है कि एक नया गलियारा, आईएमईसी (भारतीय-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारा) तैयार किया जाए… यह एक ऐसी परियोजना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य के भू-राजनीतिक अवरोधों को दरकिनार कर सकती है…’
Israel ने रणनीतिक तरीके से अब Iran के मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम पर हमले शुरू कर दिए हैं. इजराइली एयर फॉर्स के विमान ने Iran के धार्मिक शहर Qom में एक सशस्त्र बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर को निशाना बनाया और उसे नष्ट कर दिया। ये लॉन्चर Israel पर हमले के लिए तैयार था. Israel ने Isfahan में भी एक ईरानी हवाई रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया.
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ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल जंग में अब फ्रांस भी कूद पड़ा है. ताजा जानकारी के मुताबिक फ्रांस ने भी अमेरिका को अपना एयरबेस इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है
क्षेत्रीय तनाव चरम पर होने की वजह से Qatar सिविल एविएशन अथॉरिटी ने सुरक्षा कारणों से हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है. Qatar Airways ने 27 फरवरी से उड़ानें रोकीं थीं और फिलहाल हामद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कोई संचालन नहीं हो रहा. अगला अपडेट 6 मार्च सुबह 9 बजे जारी होगा.
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रायसीना संवाद 2026 को संबोधित करते हुए अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा, ‘हमें अपने लोगों को यह समझाने में सक्षम होना होगा कि हम कैसे फिर से मजबूत बन रहे हैं और स्पष्ट रूप से कहें तो, हम अन्य देशों से भी यही अपेक्षा करते हैं कि वे अपने हितों का ध्यान रखें. इसलिए, जिस प्रकार राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहते हैं, उसी प्रकार वे भारत के प्रधानमंत्री या अन्य नेताओं से भी यही अपेक्षा करेंगे कि वे अपने देशों को फिर से महान बनाना चाहें. अंततः राष्ट्रीय संप्रभुता ही अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का आधार है…”
ईरान के जनरल स्टाफ ने बयान जारी कर कहा कि उसने तुर्की की ओर कोई मिसाइल नहीं दागी. बयान के अनुसार – हम पड़ोसी मित्र देश तुर्की की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और किसी भी मिसाइल दागने से इंकार करते हैं. लेकिन NATO सदस्य Turkey ने मसले पर Iran के राजदूत को तलब किया और नाराज़गी जताई.
Turkey ने कहा हम ईरान में PJK जैसे आतंकी संगठनों की गतिविधियों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपनी नजर रख रहे हैं. हम इस बात पर जोर देते हैं कि शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों का जवाब देने का अधिकार हम सुरक्षित रखते हैं. Turkey ने कहा हमला जहां से भी हो जवाबी कार्रवाई किया जायेगा.
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N12 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मिसाइल हमलों के कारण तेल अवीव के बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर ‘एल अल’ की रेस्क्यू फ्लाइट लैंड नहीं कर सकी।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, अमेरिका ने हिंद महासागर में उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जो भारतीय नौसेना का अतिथि था।
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कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने इजरायल को ‘रंगभेदी राज्य’ बताते हुए अमेरिकी सैन्य सहायता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मोजतबा खामेनेई के सत्ता की ओर बढ़ने से ईरान का कट्टरपंथी रुख और कड़ा होगा, जिससे इजरायल और अमेरिका के लिए सुरक्षा चुनौतियां बढ़ेंगी।
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Iran israel War Live Update: मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सीधे युद्ध में बदल गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर चौतरफा हमला बोल दिया है, जिससे तेहरान समेत ईरान के कई शहर धमाकों से दहल उठे हैं। अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद भड़की इस आग ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
ईरान पर हमले के साथ ही इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने अपने देश के भीतर भी युद्धस्तर पर सुरक्षा बढ़ा दी है। पूरे इजरायल में सायरन बजाकर जनता को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने लोगों के मोबाइल फोन पर सीधे अलर्ट भेजकर निर्देश दिया है कि वे सुरक्षित स्थानों और बंकरों के करीब रहें। आईडीएफ ने साफ किया है कि यह एक ‘प्रोएक्टिव अलर्ट’ है ताकि ईरान की ओर से संभावित मिसाइल हमलों से नागरिकों को बचाया जा सके। इजरायली सेना ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। क्षेत्र में हालात पल-पल बदल रहे हैं और तनाव काफी बढ़ गया है।
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मिडिल ईस्ट में 2026 का यह साल इतिहास के सबसे भयानक सैन्य संघर्ष का गवाह बन रहा है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है।
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क्या अमेरिका इस युद्ध में शामिल है?
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अमेरिका इस युद्ध में केवल सहयोगी नहीं बल्कि मुख्य खिलाड़ी की भूमिका में है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिकी वायुसेना के B-2 स्टील्थ बॉम्बर और नौसेना के मिसाइल डिस्ट्रॉयर सीधे तौर पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी सेना ईरान की जवाबी क्षमता को खत्म करने तक पीछे नहीं हटेगी।
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अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला क्यों किया?
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इस हमले के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिसे अमेरिका और इजरायल अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे थे। इसके अलावा, IRGC द्वारा अमेरिकी हितों पर लगातार किए जा रहे हमले और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सांप का सिर काटने’ की रणनीति के तहत यह हमला किया गया है।
खामेनेई की मौत के बाद क्या हुआ?
1 मार्च 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने ईरान और मुस्लिम जगत में उबाल पैदा कर दिया है। इसके तुरंत बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहरा गया और एक अंतरिम परिषद ने सत्ता संभाली। खामेनेई की मौत को ‘इस्लाम पर हमला’ बताते हुए ईरान ने ‘इंतकाम’ का ऐलान किया और खाड़ी के 8 देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की झड़ी लगा दी।
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?
रक्षा विशेषज्ञ इस टकराव को तीसरे विश्व युद्ध की आहट मान रहे हैं। जिस तरह से रूस और चीन ने इस हमले की निंदा की है और हिजबुल्लाह व हुथी जैसे गुट सक्रिय हुए हैं, उससे यह युद्ध वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा पैदा हो गया है। यदि नाटो देश और ईरान के मित्र देश सीधे तौर पर आमने-सामने आते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा।
इस युद्ध में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
वर्तमान में इस युद्ध के दो मुख्य धड़े बन चुके हैं:
एक पक्ष: अमेरिका और इजरायल, जिन्हें ब्रिटेन और कुछ यूरोपीय देशों का नैतिक समर्थन प्राप्त है।
दूसरा पक्ष: ईरान, जिसके साथ उसके प्रॉक्सी संगठन (हिजबुल्लाह, हुथी) और लेबनान, यमन व इराक के कुछ हिस्से शामिल हैं।
प्रभावित देश: बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, ओमान और जॉर्डन, जिनके क्षेत्र में स्थित अमेरिकी अड्डों को ईरान निशाना बना रहा है।
युद्ध की टाइमलाइन: फरवरी-मार्च 2026
28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लॉन्च किया। ईरान के 27 सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की गई।
1 मार्च: सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की हमले में मौत की पुष्टि हुई।
2 मार्च: ईरान का भीषण पलटवार शुरू हुआ। अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘अब्राहम लिंकन’ पर मिसाइलें दागी गईं और 8 देशों में अमेरिकी बेस पर हमला किया गया।
दुनिया पर इस युद्ध का असर
तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
उड़ानों में बाधा: मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बंद होने से उड़ानें रद्द या डाइवर्ट कर दी गई हैं।
आर्थिक अस्थिरता: शेयर बाजारों में गिरावट है और निवेशक सोने की ओर भाग रहे हैं।
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