मध्य-पूर्व की जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. अमरीका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले और तेज कर दिए हैं. अमरीकी वायुसेना अब विशेष रूप से उन ठिकानों को निशाना बना रही है जो जमीन के काफी नीचे बनाए गए हैं और जहां मिसाइलों का बड़ा भंडार मौजूद है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका ने ईरान में 2000 पाउंड वजन वाले दर्जनों बंकर-भेदी बम गिराए हैं ताकि पाताल में छिपे दुश्मन के अड्डों को खत्म किया जा सके. अमरीकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने बताया कि जीपीएस-नियंत्रित इन बमों ने ईरान के कई भूमिगत मिसाइल लॉन्चरों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.

मिसाइल और ड्रोन क्षमता पर चोट

अमरीका की सबसे बड़ी सैन्य प्राथमिकता फिलहाल ईरान की मिसाइल बनाने और उन्हें दागने की क्षमता को जड़ से मिटाना है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जनरल केन के अनुसार इन हमलों में केवल मिसाइल ठिकाने ही नही बल्कि ड्रोन निर्माण कारखानों को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया है. ईरान ने बरसों से अपने हथियारों का जखीरा और लॉन्चिंग पैड गहरी सुरंगों और मजबूत बंकरों में छिपा रखे थे ताकि वे हवाई हमलों से बचे रहें. हालांकि अमरीका के इन आधुनिक और भारी-भरकम बमों ने ईरान के इस सुरक्षा चक्र को तोड़ दिया है जिससे उसकी स्वायत्त ड्रोन शक्ति काफी कमजोर पड़ गई है.

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परमाणु ठिकानों की बड़ी चुनौती

अमरीकी सेना भले ही मिसाइल क्षमता को चोट पहुंचाने का दावा कर रही हो लेकिन ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने अभी भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं. इन ठिकानों में बड़े पैमाने पर समृद्ध यूरेनियम रखा गया है जिसे केवल हवाई हमलों से पूरी तरह नष्ट करना मुमकिन नही माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन परमाणु भंडारों को खत्म करने के लिए अमरीकी प्रशासन अब जमीनी सैन्य अभियान यानी ग्राउंड ऑपरेशन पर भी विचार कर रहा है. अगर ऐसा होता है तो यह मिशन बहुत जोखिम भरा होगा क्योंकि परमाणु केंद्रों को कब्जे में लेने के लिए विशेष बलों की एक बड़ी टुकड़ी की जरूरत पड़ेगी.

क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर

अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते इन हमलों ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और ज्यादा बढ़ता है तो इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नही रहेगा. इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा. तेल की सप्लाई रुकने और युद्ध के फैलने की आशंका से पूरी दुनिया में डर का माहौल है. अब देखना यह होगा कि अमरीका के इस 'पाताल तोड़' हमले के बाद ईरान का अगला कदम क्या होता है और क्या यह जंग किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत है.