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ट्रंप के भरोसे खुद को आग में झोंका, पीछे मुड़े तो गायब था 'मददगार'; जानें- गुस्से में क्यों ईरान के प्रदर्शनकारी

ट्रंप के भरोसे ईरान के हजारों प्रदर्शनकारी सडकों पर उतर आए थे. आर्थिक सुधारों के लिए शुरू हुए प्रदर्शन तुरंत ही सरकार बदलने के आंदोलन में बदल गया.

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ईरान में हुए प्रदर्शनों में हजारों लोगों की जान चली गई.

ईरान में तीन सप्ताह से सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों को डोनाल्ड ट्रंप में उम्मीद की किरण नजर आ रही थी. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का रुख बदलने के बाद प्रदर्शनकारियों को लग रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है. जब विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया था और ईरान की सरकार को चेतावनी दी थी.

ट्रंप की ‘मदद’ का वादा

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यहां तक कह दिया था कि प्रदर्शनकारियों के लिए मदद ‘रास्ते’ में है. इसके अलावा उन्होंने ईरान सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया तो उसका नतीजा बुरा होगा, अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार बैठा है. इसकी वजह से प्रदर्शनकारियों के हौसले बढ़ गए थे, उन्हें लग रहा था कि अमेरिका ईरान में सैन्य कार्रवाई करेगा. लोग बिना अपनी जान की परवाह किए, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.

यह भी पढ़ें : ‘हम युद्ध नहीं चाहते’, खामेनेई ने ट्रंप पर फोड़ा ठीकरा; अमेरिका को बताया ईरान ‘निगलने’ का भूखा

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फिर बदला ट्रंप का रुख

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मध्य-पूर्व के एक अहम आर्मी बेस से कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दे दिया था. फिर ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान की सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं देगा. साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि अब अमेरिका ईरान में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. लेकिन ट्रंप का यह बदला रुख वाशिंगटन के भरोसे अपनी जान जोखिम में डालने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए एक सदमा था.

अब क्या कह रही ईरान की जनता

‘टाइम मैगजीन’ ने तेहरान के एक बिजनसमैन के हवाले से लिखा है, ‘इन 15,000 लोगों की मौत के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं. क्योंकि कई प्रदर्शनकारी तब सड़कों पर उतरे जब उन्होंने उनका (ट्रंप) पोस्ट देखा कि अमेरिका ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ यानी हमले के लिए तैयार है. अमेरिका ने ‘ईरानियों को इस तरह धोखा देने’ के लिए निश्चित रूप से इस्लामिक रिपब्लिक के साथ कोई डील की होगी.’

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देश छोड़ने के बाद एक ईरानी ने कहा, ‘जब उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि अब कोई हत्या और फांसी नहीं होगी, तो हर कोई दंग रह गया. हर कोई गुस्से में था. वे बस यही कहते रहे कि इसने हमें हर तरफ से यूज किया है. ईरानियों को लगता है कि उनके साथ खेला गया, उन्हें मूर्ख बनाया, उन्हें धोखा दिया गया.’

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ट्रंप पर भरोसा करके सड़कों पर उतरने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने सब खराब कर दिया. उन्होंने हमारे पैरों के नीचे से जमीन खींच ली.

इन लोगों का कहना है कि ट्रंप के बयानों ने ऐसी उम्मीदें जगाईं, जिसकी वजह से लोग सीधे सरकार का विरोध करने लगे. लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उनका समर्थन गायब हो गया. कुछ का मानना ​​है कि बंद दरवाजों के पीछे कोई डील हुई है.

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तेहरान की एक महिला ने कहा, ‘मैंने सारी उम्मीद खो दी है. ट्रंप कुछ नहीं करने वाले. वह क्यों करेंगे? उन्हें हमारी परवाह नहीं है.’

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ट्रंप के खिलाफ गुस्सा तब और बढ़ गया जब ईरानी अधिकारियों ने खुलेआम ट्रंप के दावों का मजाक उड़ाया और अधिक दमन करने की बात कही.

रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों के एक छोटे समूह अभी भी लगता है कि ट्रंप का पीछे हटना रणनीतिक हो सकता है. तेहरान के एक इंजीनियर ने कहा कि वह शासन को चकमा दे रहे हैं.

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क्यों हुए थे प्रदर्शन

ईरान में ये विरोध-प्रदर्शन दिसंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुए थे. ये विरोध-प्रदर्शन गिरती करेंसी, महंगाई और दूसरे मुद्दों को लेकर हो रहे थे. शुरू में ये प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों को फोकस में रखते हुए शुरू हुए थे, उसके बाद ये राजनीतिक सुधार और सरकार में बदलाव के आह्वान तक पहुंच गए. ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी और अन्य विपक्षी समूहों के आह्वान के बाद, देश भर में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे. ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए संचार काट दिया, सुरक्षा बल तैनात किए और घातक हिंसा का इस्तेमाल किया था.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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