चारों तरफ प्रदर्शन, नहीं कर पा रहे थे किसी से बात… ईरान के 'नर्क' से बचकर निकले भारतीय, सुनाई खौफनाक आपबीती

दिसंबर के आखिरी सप्ताह में खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. पिछले दो हफ्तों में हिंसक कार्रवाई में लगभग 3,000 लोगों की जान चली गई.

Iran-Protests

ईरान में जारी है विरोध-प्रदर्शन.

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ईरान की खामेनेई सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद, ईरान से भारतीयों को लेकर पहली दो कमर्शियल उड़ानें शुक्रवार देर रात दिल्ली में उतरीं. ये नियमित उड़ानें थीं और निकासी अभियान का हिस्सा नहीं थीं. हालांकि, भारत सरकार किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. भारत सरकार ने पहले ही अपने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा के खिलाफ चेतावनी दी थी. बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने थोड़े समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था, जिसकी वजह से कुछ उड़ानें प्रभावित हुई थीं. अब स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ती दिख रही है. हालांकि, ईरान का एयरस्पेस फिर से शुरू होने पर कई भारतीयों ने वापस लौटने का फैसला किया.

भारत वापस आए नागरिकों ने संकट के दौरान मदद के लिए सरकार को धन्यवाद दिया. तेहरान में भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की थी और ईरान से निकासी के लिए भारतीय तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और व्यापारियों के संपर्क में था.

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ईरान से लौटी एक एमबीबीएस छात्रा ने कहा कि उसने विरोध प्रदर्शनों के बारे में सुना था लेकिन खुद कभी कोई आंदोलन नहीं देखा, हालांकि वहां इंटरनेट नहीं था.

एक अन्य भारतीय नागरिक (जो एक महीने से ईरान में था) ने कहा कि उसे पिछले कुछ हफ्तों से ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. उसने कहा, ‘जब हम बाहर जाते थे, तो प्रदर्शनकारी कार के सामने आ जाते थे. वे थोड़ी परेशानी पैदा करते थे. इंटरनेट नहीं था. इस वजह से हम अपने परिवारों को सूचित नहीं कर सके और हम थोड़े चिंतित थे. हम दूतावास से भी संपर्क नहीं कर सके.’

काम के सिलसिले में ईरान गए एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने कहा कि अब स्थिति में सुधार हुआ है और नेटवर्क की समस्या ही एकमात्र परेशानी थी जिसका उन्होंने सामना किया.

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एक अन्य नागरिक ने छात्रों को वापस लाने के प्रयासों के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, ‘लोग चिंतित थे, लेकिन अब तेहरान का माहौल सामान्य है. वहां आग लगी थी; प्रदर्शन खतरनाक थे. हालांकि, सरकार का समर्थन करने वालों की तुलना में प्रदर्शनकारी कम थे.’

बता दें, दिसंबर के आखिरी सप्ताह में खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. पिछले दो हफ्तों में हिंसक कार्रवाई में लगभग 3,000 लोगों की जान चली गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शासन के बीच धमकियों के आदान-प्रदान ने भी सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ा दी थी. हालांकि, अब स्थिति में सुधार होता दिख रहा है, ट्रंप ने इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ अपना आक्रामक रुख छोड़ दिया है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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