Strait of Hormuz fees: अमेरिका के साथ तनाव के माहौल में ईरान ने एक बड़ा वैश्विक फैसला लिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह आने वाले समय में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से गुजरने वाले सभी जहाजों से सर्विस फीस यानी सेवा शुल्क वसूल करेगा। तेहरान के इस अप्रत्याशित कदम से दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इस मार्ग से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है और इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों पर पड़ सकता है।

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मित्र देशों को राहत का भरोसा

इस घोषणा के बाद यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या भारत को भी इस रूट से गुजरने के लिए ईरान को भारी-भरकम फीस चुकानी होगी? इस पर ईरान की तरफ से भारत के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। चीन के बीजिंग में आयोजित 'वर्ल्ड पीस फोरम' में बोलते हुए चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फाजली ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए वहां से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस लेना उनका अधिकार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे सामान्य टोल टैक्स की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान उन मित्र देशों के लिए 'विशेष रियायत या स्पेशल ट्रीटमेंट' पर विचार करेगा, जो मुश्किल समय में हमेशा ईरान के साथ खड़े रहे हैं।

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भारत और ईरान के मजबूत रिश्ते

ईरान ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह फीस किस प्रक्रिया के तहत लागू होगी और कौन से देश पूरी तरह इससे बाहर रहेंगे। लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ ईरान के रिश्ते हमेशा से बेहद मजबूत और नरम रहे हैं। इससे पहले भी जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी थी और होर्मुज रूट पर पाबंदियां लगी थीं, तब भी ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की विशेष अनुमति दी थी।

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भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी कुछ समय पहले स्पष्ट किया था कि भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि भारत और ईरान के हित और भविष्य एक जैसे हैं और भारत ने हमेशा खुद को एक भरोसेमंद साझेदार साबित किया है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि पुरानी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी के चलते भारत को इस नए सर्विस टैक्स से छूट मिल सकती है।

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