अमेरिका की घेराबंदी पर ईरान का रुख अब तक का सबसे आक्रामक रहा है. ईरान के सरकारी अखबार 'तेहरान टाइम्स' ने फ्रंट पेज पर "Welcome to Hell" नरक में स्वागत है, लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी सैनिकों के कदम रखते ही ईरान पलटवार करेगा. ईरानी अधिकारियों ने दोटूक कहा है कि, "जो सैनिक जमीन पर उतरेंगे, वे केवल ताबूतों में ही वापस जाएंगे." ईरान ने खाड़ी के देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका को न करने दें.
क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य साजो-सामान की बढ़ती मौजूदगी के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा है. ईरानी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका ने हवाई हमलों के बजाय जमीन पर उतरने की गलती की, तो उसे भारी जानी नुकसान उठाना पड़ेगा.
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10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने पर विचार
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषकर 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने के लिए 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में 3,500 नौसैनिकों के साथ घातक युद्धपोत USS Tripoli पहले ही ऑपरेशन जोन में मोर्चा संभाल चुका है.
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खार्क द्वीप बना 'फ्लैशपॉइंट'
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इन अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान के रणनीतिक खार्क द्वीप की घेराबंदी करना हो सकता है। यह द्वीप ईरान के 90% कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस द्वीप पर नियंत्रण कर ईरान को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाना चाहता है और उसे 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' खोलने के लिए मजबूर करना चाहता है।
पेंटागन की रणनीति: कूटनीति या आक्रमण?
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया पर 'शांति वार्ता' की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर सैनिकों की बढ़ती तादाद कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती केवल 'रक्षात्मक विकल्प' है, लेकिन 82nd एयरबोर्न डिवीजन और बख्तरबंद इकाइयों की सक्रियता किसी बड़े जमीनी ऑपरेशन का संकेत दे रही है.