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'ताबूतों में वापस जाएंगे अमेरिकी सैनिक', ईरान की अमेरिका को दोटूक चेतावनी

मिडिल ईस्ट में बारूद का ढेर तैयार है. एक ओर अमेरिका ने 3500 से ज्यादा जांबाज सैनिकों की तैनाती कर दी है और घातक युद्धपोत USS Tripoli ने ऑपरेशन जोन में पोजीशन ले ली है. इधर ईरान ने भी कह दिया है—’जमीन पर कदम रखा तो ताबूतों में वापस जाओगे.’ पढ़ें, क्या है ईरान का ‘वेलकम टू हेल’ प्लान

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अमेरिका की घेराबंदी पर ईरान का रुख अब तक का सबसे आक्रामक रहा है. ईरान के सरकारी अखबार ‘तेहरान टाइम्स’ ने फ्रंट पेज पर “Welcome to Hell” नरक में स्वागत है, लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी सैनिकों के कदम रखते ही ईरान पलटवार करेगा. ईरानी अधिकारियों ने दोटूक कहा है कि, “जो सैनिक जमीन पर उतरेंगे, वे केवल ताबूतों में ही वापस जाएंगे.” ईरान ने खाड़ी के देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका को न करने दें.

क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य साजो-सामान की बढ़ती मौजूदगी के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा है. ईरानी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका ने हवाई हमलों के बजाय जमीन पर उतरने की गलती की, तो उसे भारी जानी नुकसान उठाना पड़ेगा.

10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने पर विचार

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषकर ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने के लिए 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में 3,500 नौसैनिकों के साथ घातक युद्धपोत USS Tripoli पहले ही ऑपरेशन जोन में मोर्चा संभाल चुका है.

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खार्क द्वीप बना ‘फ्लैशपॉइंट’

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इन अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान के रणनीतिक खार्क द्वीप की घेराबंदी करना हो सकता है। यह द्वीप ईरान के 90% कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस द्वीप पर नियंत्रण कर ईरान को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाना चाहता है और उसे ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ खोलने के लिए मजबूर करना चाहता है।

पेंटागन की रणनीति: कूटनीति या आक्रमण?

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया पर ‘शांति वार्ता’ की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर सैनिकों की बढ़ती तादाद कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती केवल ‘रक्षात्मक विकल्प’ है, लेकिन 82nd एयरबोर्न डिवीजन और बख्तरबंद इकाइयों की सक्रियता किसी बड़े जमीनी ऑपरेशन का संकेत दे रही है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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