अमेरिका के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नस दबाने का सबसे खतरनाक दांव चल दिया है. ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे अहम जल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने का ऐलान किया है. कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर किसी भी देश के जहाज ने यहां से गुजरने की कोशिश की, तो ईरानी नौसेना के जवान उन जहाजों को देखते ही आग के हवाले कर देंगे. शनिवार को शुरू हुई इस नाकाबंदी के बाद ईरान की ओर से यह अब तक की सबसे बड़ी और सीधी धमकी है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में ही फैसला होगा.
क्यों है ‘होर्मुज’ दुनिया की सबसे अहम नस?
होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. इसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार की धड़कन माना जाता है क्योंकि दुनिया भर में खपत होने वाले कुल कच्चे तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी छोटे से रास्ते से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना निर्यात करने के लिए पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर हैं. ईरान का यह फैसला केवल एक सैन्य कदम नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को ठप करने की एक सोची-समझी साजिश है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह चरमरा सकता है.
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भारत के लिए बड़ा झटका और महंगाई का खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना भारत के लिए किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है. भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है. अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति की चैन टूट सकती है. इसका सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम आदमी की रसोई से लेकर बाजार तक महंगाई का तांडव मच सकता है. साथ ही कच्चा तेल महंगा होने से भारत का राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा, जिससे शेयर बाजार और रुपया दोनों ही कमजोर हो सकते हैं.
वैश्विक कूटनीति और संतुलित रणनीति की चुनौती
मौजूदा हालात में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी कूटनीति को संतुलित रखने की है. भारत के ईरान के साथ-साथ सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से भी बेहद गहरे और रणनीतिक संबंध हैं. ऐसे में समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए भारत को अपने वैश्विक सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना होगा. अमेरिका जहां एक ओर दावा कर रहा है कि उसने अभी तक कोई बड़ा हमला नहीं किया है, वहीं ईरान की यह आक्रामक नाकाबंदी दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर धकेल रही है. यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे परिवहन लागत और पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति बदतर हो सकती है.
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