मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध के बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा को लेकर दुनिया को एक बड़ा संकेत दिया है. फारसी नव वर्ष के मौके पर ईरान की कैबिनेट मीटिंग किसी आलीशान दफ्तर में नहीं बल्कि कंक्रीट की मजबूत दीवारों वाले एक बेहद सुरक्षित भूमिगत बंकर में आयोजित की गई. सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में ईरानी मंत्री एक किलेबंद हॉल में बैठे नजर आ रहे हैं जिसे देखकर सोशल मीडिया पर जंग की आहट तेज होने की चर्चाएं छिड़ गई हैं. हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस गुप्त स्थान के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है लेकिन जानकारों का मानना है कि संभावित हवाई हमलों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए सरकार अब पाताल लोक से अपना कामकाज चला रही है.

अमेरिका के साथ 'डायरेक्ट' बातचीत से साफ इनकार

बंकर में हुई इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वाशिंगटन के साथ किसी भी सीधी बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है. बघाई ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि अब तक अमेरिका के साथ कोई भी प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है हालांकि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की तरफ से बातचीत के संदेश जरूर मिले हैं. ईरान का मानना है कि जब अमेरिका कूटनीति की बात करता है तो उस पर भरोसा करना मुश्किल होता है क्योंकि खुद दुनिया भर में अमेरिकी दावों की साख काफी कम है. ईरान ने अपना रुख स्थिर रखा है जबकि अमेरिकी प्रशासन बार-बार अपने बयानों और फैसलों को बदलकर विरोधाभास पैदा कर रहा है.

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15 सूत्रीय प्लान और 'अव्यावहारिक' शर्तों का विवाद

ईरान के पास मध्यस्थों के जरिए जो प्रस्ताव पहुंचे हैं उनमें कथित तौर पर एक 15 सूत्रीय योजना शामिल है लेकिन तेहरान ने इसे सिरे से 'तर्कहीन' करार दिया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक इन प्रस्तावों में ऐसी मांगें रखी गई हैं जिन्हें पूरा करना ईरान के लिए मुमकिन नहीं है और जो पूरी तरह से एकतरफा नजर आती हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर ऐसी शर्तों को नहीं मानेगा जो उसकी संप्रभुता के खिलाफ हों. कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका पर्दे के पीछे से ईरान पर झुकने का दबाव बना रहा है लेकिन बंकर से आ रही तस्वीरें बताती हैं कि तेहरान अब झुकने के बजाय टकराने की पूरी तैयारी कर चुका है.

क्षेत्रीय बैठकों से दूरी और भविष्य की रणनीति

हाल ही में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक बड़ी बैठक हुई थी जिसमें ईरान शामिल नहीं हुआ. प्रवक्ता बघाई ने स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान पड़ोसी देशों की शांति की कोशिशों की सराहना करता है लेकिन किसी भी युद्ध पर चर्चा करते समय यह देखना जरूरी है कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी. ईरान फिलहाल अपनी सुरक्षा घेराबंदी को मजबूत करने में जुटा है और बंकर मीटिंग इसी रणनीति का एक हिस्सा मानी जा रही है. आने वाले दिनों में अगर तनाव और बढ़ता है तो ईरान अपनी पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को इन्हीं सुरक्षित ठिकानों से संचालित कर सकता है जिससे उसकी सैन्य और राजनीतिक कमान सुरक्षित बनी रहे.