मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का सबसे अहम रूट ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के फिर से खुलने की उम्मीद बनी है. ईरान ने कतर की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका को एक ठोस सात दिन की योजना भेजी है. ईरान ने ये शर्तें तब भेजी हैं, जब वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट क्राइसिस पर लंबी चर्चा की है.
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का अहम रूट बंद होने के चलते कच्चे तेल की इंटरनेशनल सप्लाई बुरी तरह चरमराई हुई है. चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर है, इसलिए होर्मुज फिर से खोलने पर जोर दे रहा है.
क्या हैं ईरान की शर्तें?
संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से बात करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि तेहरान ने कतर के जरिए अमेरिका तक अपना प्रस्ताव पहुंचा दिया है. अराघची ने कहा, ‘यदि आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो सात दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है. यह 7 दिनों की अवधि तभी शुरू होगी जब वॉशिंगटन इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेगा. अब फैसला पूरी तरह से अमेरिका के हाथ में है.’
शर्तें पूरी होने पर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोलेगा और लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को रोकेगा. वहीं, तेहरान ने मांग की है कि ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाई जाए, अमेरिका और पश्चिमी बैंकों में फ्रीज ईरानी फंड को जारी किया जाए और ईरान के तेल निर्यात पर लगे बैन में राहत दी जाए.
परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मध्यस्थों के जरिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और परमाणु मसला भी वार्ता का हिस्सा है. हालांकि, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि शांति समझौता स्वीकार होने के बावजूद तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करेगा. अधिकारी के मुताबिक, ईरान यूरेनियम संवर्धन का अपना अधिकार बरकरार रखेगा और अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने के किसी प्रस्ताव पर सहमत नहीं होगा. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहराते रहे हैं कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत कभी नहीं देगा.
ट्रंप-जिनपिंग समिट में उठा मुद्दा
वॉशिंगटन में हुई ट्रंप-जिनपिंग शिखर बैठक में भी यह युद्ध केंद्र में रहा. चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान दोनों से आग्रह किया कि वे जून में हुए उस फ्रेमवर्क समझौते की ओर लौटें, जिसके तहत कुछ दिनों के लिए सीजफायर हुआ था, ताकि स्थायी शांति के लिए बातचीत फिर शुरू हो सके.