Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को सुलझाने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान को इस मामले में मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है. ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इब्राहिम रेजाई ने दोटूक शब्दों में कहा कि एक मध्यस्थ को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष की ओर झुका हुआ. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान हमारा एक अच्छा पड़ोसी और मित्र देश है, लेकिन जब बात कूटनीतिक वार्ताओं और मध्यस्थता की आती है, तो वह इसके लिए उपयुक्त नहीं है." ईरान का मानना है कि पाकिस्तान का झुकाव अक्सर दूसरे पक्ष की ओर रहता है, जो बातचीत की मूल भावना के खिलाफ है.

अमेरिका पर भी साधा निशाना

रेजाई ने पाकिस्तान की असमर्थता को दर्शाने के लिए एक पुराना उदाहरण भी दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दुनिया को यह बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के एक प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपनी बात से मुकर गया. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकियों ने लेबनान संकट और ईरान की प्रतिबंधित संपत्तियों को लेकर कई वादे और करार किए थे, लेकिन बाद में वे अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गए. रेजाई के अनुसार, पाकिस्तान इन मामलों में अमेरिका पर दबाव बनाने या सच बोलने में विफल रहा है.

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क्या है ईरान का कड़ा रुख?

ईरान के इस बयान से साफ है कि वह अब किसी भी ऐसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा जहाँ उसे लगे कि बिचौलिया देश अमेरिका के प्रभाव में है. यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की उस छवि को भी चोट पहुँचाता है, जिसमें वह खुद को मुस्लिम देशों और पश्चिम के बीच एक सेतु (Bridge) के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है.

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