ईरान में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में चुना गया है. लेकिन अब वे दुनिया भर में रहबर एंघेलाब के नाम से जाने जाएंगे. यह नाम उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां से उन्होंने अपना पहला संबोधन जारी किया. इस हैंडल (@Rahbarenghelab_) के जरिए मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जंग जारी रखने का साफ ऐलान किया है. इससे पहले उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई का आधिकारिक हैंडल "खामेनेई ईरान" था, जो अब भी सक्रिय है.

क्या है 'रहबर-ए-एंघेलाब' का अर्थ?

ईरानी साहित्य और फारसी शब्दावली के अनुसार, 'एंघेलाब' शब्द का अर्थ 'क्रांति' या 'बड़ा परिवर्तन' होता है. यह शब्द ईरान के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान इसी शब्द ने पूरे देश को एकजुट किया था. जब ईरान में बड़े बदलाव आए थे और तेहरान की एक प्रमुख सड़क का नाम भी एंघेलाब स्ट्रीट रखा गया था.
वहीं, 'रहबर' का अर्थ होता है 'मार्गदर्शक' या वह नेता जो राह दिखाए. इस प्रकार, 'रहबर-ए-एंघेलाब' का पूरा मतलब हुआ— "क्रांति का मार्गदर्शक" या "क्रांति का नेता". विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाम के जरिए मुज्तबा यह संदेश देना चाहते हैं कि वह ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

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पहले संबोधन में ही तेवर कड़े

टीवी 9 की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम लीडर बनने के बाद मुज्तबा ने 6 अलग-अलग भाषाओं में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स शुरू किए हैं. महज 2 दिनों में ही इन अकाउंट्स पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं. अपने पहले आधिकारिक संबोधन में उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान की विदेश नीति में कोई नरमी नहीं आएगी. उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग जारी रखने की स्पष्ट घोषणा की है. दिलचस्प बात यह है कि जहां पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का हैंडल '@khamenei_ir' था, वहीं मुज्तबा ने खुद को सीधे क्रांति के प्रतीक नाम से जोड़ा है.

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मुज्तबा खामेनेई कब बने सुप्रीम लीडर?

ईरान की निर्णायक समिति ने 8 मार्च 2026 को मुज्तबा खामेनेई को आधिकारिक तौर पर नए सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया. 56 साल के मुज्तबा खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे नंबर के बेटे हैं. 17 साल की उम्र में ईरान की सेना में शामिल हुए और इराक के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया. 1990 के दशक में सुप्रीम लीडर के दफ्तर से जुड़े और नेताओं के साथ समन्वय का काम संभाला. 2022 में उन्हें अयातुल्ला की उपाधि दी गई. राजनीतिक कमेटियों में सक्रिय रहे. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास लंदन और खाड़ी देशों में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति है.