मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है. ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले कर अपने जवाबी अभियान को तेज कर दिया है. इनमें बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के बेहद अहम सैन्य बेस 'यूएस फिफ्थ फ्लीट' को भी निशाना बनाया गया, जिसे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी माना जाता है. ईरान की इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने भी पलटवार करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए.

अमेरिका ने ईरान पर बरसाए बम

वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने सैन्य कार्रवाई का दूसरा चरण शुरू करते हुए ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल लॉन्च साइटों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. यूएस का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था. ईरान मीडिया के अनुसार, अमेरिकी मिसाइलों ने होर्मुज के पास स्थित हेंगाम द्वीप पर भी हमला किया.

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अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल होर्मुज में समुद्री यातायात को सुरक्षित करना नहीं, बल्कि ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को भी नष्ट करना है जो भविष्य में अमेरिकी अभियानों के लिए चुनौती बन सकती हैं.

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'अमेरिका के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई'


ईरान की संसद के अध्यक्ष और शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने अमेरिकी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका देश 'अमेरिका के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई' लड़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल बनाए रखने से जुड़ी है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दोबारा चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटता है तो अमेरिका पावर प्लांट्स और दूसरे महत्वपूर्ण टार्गेट्स पर भी हमले करने से पीछे नहीं हटेगा.

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