ईरान की सुप्रीम लीडरशिप के खात्मे के दावों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा बयान जारी कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ट्रंप ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि तेहरान पर हमले का आदेश उन्होंने ही दिया था ताकि ईरान के परमाणु विकास और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर हमेशा के लिए रोक लगाई जा सके. ट्रंप ने दो वीडियो जारी कर कहा कि हम ईरान को कभी भी परमाणु संपन्न देश नहीं बनने देंगे क्योंकि वह बहुत तेजी से इस दिशा में कदम बढ़ा रहा था. हालांकि न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने ईरान से होने वाले खतरे को लेकर कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए हैं लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह हमला करना अमेरिका के पास आखिरी और सबसे अच्छा मौका था.

पांच हफ्तों का मिशन और परमाणु हथियारों पर चोट

ट्रंप ने अपने संबोधन में बताया कि अमेरिका का यह सैन्य अभियान लगभग चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. राष्ट्रपति के मुताबिक इस लड़ाई का मुख्य मकसद ईरान को उन हथियारों को बनाने से रोकना है जिनसे वह बार-बार इनकार करता रहा है. अमेरिका का मानना है कि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु बमों से लैस ईरानी सरकार न केवल मिडिल ईस्ट के लिए बल्कि खुद अमेरिका के लोगों के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकती थी. ट्रंप ने इस मुहीम को एक आतंकवादी शासन के खतरों को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका बताया है और कहा है कि वे अब पीछे नहीं हटने वाले हैं.

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ईरानी नेवी की तबाही और 10 जहाजों का खात्मा

अपनी सेना की बहादुरी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी फौज ने समुद्र में ईरान के 10 जहाजों को मार गिराया है जो अब पूरी तरह डूब चुके हैं. अमेरिका इस समय ईरान के भीतर बड़े स्तर पर कॉम्बैट ऑपरेशन चला रहा है ताकि वहां की मिसाइल क्षमताओं और नेवी को पूरी तरह अपाहिज किया जा सके. ट्रंप ने साफ किया कि उनका लक्ष्य केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित नहीं है बल्कि वे ईरान की पूरी सैन्य ताकत को नष्ट करना चाहते हैं. इस सैन्य कार्रवाई के जरिए अमेरिका उस 'भयानक शासन' की कमर तोड़ना चाहता है जो दशकों से दुनिया भर में दहशत फैला रहा था.

आतंकी गुटों पर लगाम और अमेरिकी सैनिकों की शहादत

ट्रंप ने अपने बयान में ऑपरेशन के तीन मुख्य लक्ष्यों का खुलासा किया है जिसमें परमाणु हथियार रोकना और मिसाइल क्षमताएं खत्म करना तो शामिल है ही साथ ही ईरान द्वारा मिलिटेंट ग्रुप्स को दिए जाने वाले समर्थन को जड़ से खत्म करना भी उनकी प्राथमिकता है. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस खतरनाक मिशन के दौरान अमेरिका के चार जांबाज सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है जिनकी शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा. राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि यह हमला मिडिल ईस्ट में शांति और अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी था. इस बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि अमेरिका ईरान के साथ एक आर-पार की जंग के मूड में है और वह वहां सत्ता परिवर्तन या पूर्ण सैन्य समर्पण तक नहीं रुकेगा.