मिडिल ईस्ट के बदलते समीकरणों के बीच चीन और ईरान के रिश्ते अब केवल व्यापार तक सीमित नही रह गए हैं. अमेरिका और इजरायल के बढ़ते दबाव को देखते हुए चीन लगातार ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में जुटा है. चीन पिछले कई वर्षों से ईरान को मिसाइल प्रणालियों और आधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित करने में पर्दे के पीछे से बड़ी मदद दे रहा है. इस सहयोग का सबसे बड़ा फायदा चीन को भी मिल रहा है क्योंकि ईरान इन हथियारों का इस्तेमाल सीधे वॉर जोन में कर रहा है. इससे चीन को अपने हथियारों की असली ताकत और उनकी कमियों को समझने का मौका मिल रहा है. यह रणनीतिक साझेदारी ईरान को क्षेत्र में एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा रहने का हौसला दे रही है.

समुद्र में संयुक्त अभ्यास और रडार सिस्टम

चीन और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग अब समंदर की लहरों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. हाल के वर्षों में ईरान ने चीन और रूस के साथ मिलकर हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में कई बड़े नौसैनिक अभ्यास किए हैं. इन अभ्यासों के जरिए ईरान को आधुनिक युद्ध की बारीकियां सीखने और दुनिया की महाशक्तियों के साथ तालमेल बिठाने का अनुभव मिल रहा है. जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद चीन ने ईरान को आधुनिक रडार सिस्टम, साइबर सुरक्षा उपकरण और नौसेना से जुड़ी बेहतरीन तकनीक मुहैया कराई है. यह पूरी दुनिया और खासकर अमेरिका के लिए एक सीधा संदेश है कि मुश्किल वक्त में ईरान अकेला नही है और उसे महाशक्तियों का पूरा समर्थन हासिल है.

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अंतरिक्ष से निगरानी और सैटेलाइट डेटा का खेल

ईरान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भी चीनी अनुभव का बड़ा हाथ रहा है. चीन ने ईरान को रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट और अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम विकसित करने में तकनीकी मदद दी है. इन सैटेलाइट्स की वजह से ईरान अब अपनी सीमाओं और समुद्री मार्गों पर पहले से कहीं बेहतर तरीके से नजर रख पा रहा है. चीन के पास मौजूद हाई डेफिनेशन सैटेलाइट नेटवर्क का डेटा ईरान के लिए बहुत काम का साबित हो रहा है. इसी सटीक डेटा और तस्वीरों की मदद से ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई बड़े सैन्य बेस और कमांड सेंटरों पर हमले किए हैं. अंतरिक्ष क्षेत्र में यह सहयोग ईरान की जासूसी और हमलावर क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है जिसका अहसास अमेरिका और इजरायल को भी हो चुका है.

सुरक्षित संचार और 5G नेटवर्क का विस्तार

युद्ध के मैदान के साथ-साथ संचार के मोर्चे पर भी चीन ईरान का सबसे बड़ा साथी बनकर उभरा है. चीन की बड़ी कंपनियां ईरान में सुरक्षित फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क और आधुनिक 5G तकनीक बिछाने में मदद कर रही हैं. इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से ईरान का कम्युनिकेशन नेटवर्क अब पहले से ज्यादा तेज और सुरक्षित हो गया है जिसे हैक करना आसान नही है. आधुनिक रडार और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में चीन का अनुभव ईरान की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने की दिशा में काम कर रहा है. चीन द्वारा दी जा रही यह रसद और तकनीकी सहायता मिडिल ईस्ट में अमेरिका के दबदबे को सीधी चुनौती दे रही है. आने वाले समय में यह अटूट रिश्ता पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति को पूरी तरह से बदल सकता है.