ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के साझा हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ईरान के सबसे शक्तिशाली इंसान और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्हें उनके समर्थक अभेद्य सुरक्षा कवच मानते थे, महज 30 सेकेंड के भीतर मार दिए गए. अमेरिकी मिसाइलों और इजरायली लड़ाकू विमानों ने तेहरान स्थित उनके मुख्यालय पर 30 जबरदस्त धमाके किए. आसमान में सफेद धुएं का ऐसा गुबार उठा जिसने ईरान के चार दशक पुराने नेतृत्व को हमेशा के लिए मिटा दिया. इस हमले की सटीकता और रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि खामेनेई को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला. राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मौत की पुष्टि करते हुए इसे एक क्रूर युग का अंत करार दिया है.
मीटिंग का समय बदलते ही बदला ऑपरेशन का प्लान
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इजरायल को खामेनेई की उस गुप्त मीटिंग की खबर कैसे लगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पहले यह उम्मीद थी कि खामेनेई शनिवार शाम को बैठक करेंगे. लेकिन इजरायली इंटेलिजेंस को अचानक पता चला कि मीटिंग शनिवार सुबह ही होने वाली है. खुफिया जानकारी मिलते ही जो हमला बाद में होना था, उसे तुरंत अंजाम दिया गया. यह जानकारी इतनी सटीक थी कि इजरायल को यह तक पता था कि खामेनेई किस कमरे में अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ मौजूद हैं. अगर यह लोकेशन लीक न होती, तो इस मीटिंग के तुरंत बाद खामेनेई फिर से अंडरग्राउंड होने वाले थे. इसी वजह से अब ईरान के भीतर किसी बड़े ‘भे़दिए’ या गद्दार की मौजूदगी की चर्चा तेज हो गई है.
ट्रैकिंग सिस्टम की ताकत या अपनों की गद्दारी
खामेनेई की मौत के बाद पांच बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. पहला सवाल यही है कि क्या खामेनेई के करीब कोई ऐसा शख्स था जिसने इजरायल को हर पल की जानकारी दी. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि खामेनेई अमेरिकी इंटेलिजेंस और बेहद एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम के जाल में फंस गए और बच नहीं पाए. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केवल तकनीक ही सब कुछ थी, तो अमेरिका ने उन्हें पहले क्यों नहीं पकड़ा. क्या खामेनेई हमले से ठीक पहले किसी ऐसे व्यक्ति से मिले थे जिसने अनजाने में उनकी लोकेशन ट्रैक करवा दी. इन सवालों ने ईरानी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि उन्हें डर है कि उनके सिस्टम में ऊपर से नीचे तक जासूस घुस चुके हैं.
नेतृत्वविहीन ईरान और अहमदीनेजाद का अंत
ईरान के लिए मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं. खामेनेई की मौत के गम के बीच एक और बड़ी खबर आई है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी इजरायली हमले में मारे गए हैं. एक के बाद एक बड़े नेताओं के खात्मे ने ईरान को पूरी तरह नेतृत्वविहीन होने की कगार पर खड़ा कर दिया है. सुप्रीम लीडर का दफ्तर तहस-नहस हो चुका है और वरिष्ठ सैन्य कमांडर भी इस हमले की भेंट चढ़ गए हैं. ईरान अब एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां उसके पास न तो कोई बड़ा मार्गदर्शक बचा है और न ही युद्ध की रणनीति बनाने वाला कोई दिग्गज चेहरा. पूरी दुनिया अब यह देख रही है कि क्या ईरान इस सदमे से उबर पाएगा या फिर वह पूरी तरह बिखर जाएगा.
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