इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ कमांडरों की मौत के बाद ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई से पूरी दुनिया को दहला दिया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मध्य पूर्व के 8 देशों में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक साथ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. जिन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है उनमें बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान शामिल हैं. ईरान ने साफ किया है कि उसका मकसद पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सेना को मिटाना है. इन हमलों के बाद अब सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे पूरा क्षेत्र जंग के मैदान में तब्दील हो गया है.
ईरानी उप विदेश मंत्री का बयान
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने सीएनएन से बात करते हुए इस हमले को ईरान की मजबूरी बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी धरती तक नहीं पहुंच सकता, इसलिए उनके पास अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सैन्य ठिकानों पर हमला करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. ईरान का तर्क है कि अमेरिका ने उनके सबसे बड़े नेता की हत्या कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है और अब अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बयान से साफ है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वह खाड़ी देशों में मौजूद हर उस जगह को निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी झंडा लहरा रहा है.
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अब्बास अराघची की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अलजजीरा को दिए इंटरव्यू में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सर्वोच्च नेता की हत्या एक अभूतपूर्व कृत्य है जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून बर्दाश्त नहीं करता. उन्होंने घोषणा की कि ईरान में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत एक अंतरिम परिषद का गठन कर दिया गया है जो अब देश के मामलों को संभालेगी. अराघची ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा हक है और इस जवाबी कार्रवाई के लिए उन्होंने कोई हद तय नहीं की है. उन्होंने चेतावनी दी कि सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद अब यह टकराव और भी ज्यादा जटिल और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं.
इजरायल और तेल अवीव पर मिसाइलों की बौछार
अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ ईरान ने इजरायल को भी निशाने पर लिया है. आईआरजीसी के मुताबिक तेल अवीव सहित इजरायल के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की गई है. ईरान का कहना है कि इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर उनके देश की संप्रभुता पर हमला किया है, इसलिए अब इजरायली शहर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे. इस जवाबी हमले में अत्याधुनिक ड्रोन और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है. गल्फ देशों में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार और सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाल दिया है. अब देखना यह होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के इस भीषण पलटवार का सामना किस तरह करते हैं.
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