पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के कारोबार और एक्सपोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं. इसी वजह से गल्फ देशों के लिए भेजी गई करीब 2000 हुंडई कारों को वापस भारत लाया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कारें भारत से गल्फ बाजारों के लिए भेजी गई थीं, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ने की वजह से शिपिंग कंपनियां अब अपने रूट पर दोबारा विचार कर रही हैं. ऐसे में इन कारों को वापस चेन्नई पोर्ट पर उतारने का प्लान बनाया जा सकता है.
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समुद्री रास्तों पर बढ़ा खतरा
दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है. यही रास्ते भारत से गल्फ देशों तक माल पहुंचाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं. हालात को देखते हुए कई जहाज इन रूट्स से गुजरने से बच रहे हैं या रास्ता बदल रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये संकट लंबा चलता है तो एशियाई देशों से गल्फ देशों को होने वाला ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है. भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश हर साल अरबों डॉलर की कारें इस क्षेत्र में भेजते हैं.
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कंटेनर और शिपमेंट भी प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री हालात बिगड़ने की वजह से हजारों कंटेनरों की आवाजाही प्रभावित हुई है. बताया जा रहा है कि करीब 4000 कंटेनरों को उनके तय रूट से वापस मोड़ दिया गया है, जिनमें लगभग 1800 कंटेनर चेन्नई से भेजे गए थे. इसके अलावा तमिलनाडु के कई बंदरगाहों से जहाजों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है. खासतौर पर वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट (थूथुकुडी), जो गल्फ देशों के लिए एक बड़ा एक्सपोर्ट हब माना जाता है, वहां से जाने वाले कई शिपमेंट में देरी हो रही है.
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पोर्ट प्रशासन कर रहा तैयारी
हालात को देखते हुए चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी और बाकी बंदरगाह प्रशासन वैकल्पिक इंतजाम करने में जुट गए हैं. जरूरत पड़ने पर कंटेनरों और कार्गो को रखने के लिए करीब 20,000 वर्ग मीटर का अस्थायी स्टोरेज यार्ड तैयार करने पर विचार किया जा रहा है. साथ ही पोर्ट अधिकारी और एक्सपोर्टर्स के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, ताकि जहाजों को खतरनाक समुद्री मार्गों से बचाते हुए वैकल्पिक रास्तों से भेजने के ऑप्शन तलाशे जा सकें. मिडिल ईस्ट भारत के ऑटोमोबाइल निर्यात के लिए एक बड़ा बाजार है. जानकारी के मुताबिक, भारत से होने वाले कुल कार एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है. ऐसे में अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत की ऑटो कंपनियों की सप्लाई चेन और निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है.