मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमला बेहद सटीक और प्लानिंग के साथ किया गया था, जिसमें दो ड्रोन का इस्तेमाल हुआ. जानकारी के मुताबिक, पहला ड्रोन रात करीब 1:30 बजे दूतावास परिसर से टकराया, जिससे इमारत में एक बड़ा छेद हो गया. इसके ठीक एक मिनट बाद दूसरा ड्रोन उसी रास्ते से अंदर दाखिल हुआ और पहले बने छेद के भीतर जाकर विस्फोट कर दिया. इस हमले से दूतावास की तीन मंजिलों को भारी नुकसान पहुंचा. इस हमले में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का स्थानीय स्टेशन भी चपेट में आ गया.
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CIA स्टेशन को बनाया निशाना
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने नुकसान को सीमित बताया और कहा कि आग मामूली थी, लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों का हवाला दिया गया है, एक अलग ही कहानी बयां करती है. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, आग आधे दिन तक जलती रही और दूतावास के कुछ हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिनकी मरम्मत भी नहीं की जा सकती. हमले में इमारत के एक सुरक्षित हिस्से को भेदते हुए CIA स्टेशन को निशाना बनाया गया. अधिकारियों ने कहा कि अगर ये घटना वर्किंग टाइम के दौरान हुई होती तो हालात कहीं और ज्यादा गंभीर हो सकते थे. ईरान का ये हमला सिर्फ नाममात्र नहीं था, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी था, जिससे ये साफ होता है कि ईरान अब सीधे अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है.
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US के सीनियर ऑफिसर पर भी हमले की कोशिश
रियाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास, दुनिया भर के ज्यादातर अमेरिकी राजनयिक केंद्रों की तरह, अपने खुद के एयर डिफेंस सिस्टम का संचालन नहीं करता है. ये सुरक्षा के लिए मेजबान देश पर निर्भर करता है. पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि सऊदी सेना पास के एक महल की सुरक्षा के लिए पैट्रियट सिस्टम का इस्तेमाल करती है, जिसकी कवरेज दूतावास तक फैली हुई है. कहा जा रहा है कि ड्रोन हमले वाली रात को ही ईरान ने सऊदी अरब में सबसे वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को भी निशाना बनाने की कोशिश की, जिनका आवास दूतावास से कुछ सौ फीट की दूरी पर मौजूद है. इसके बाद ईरान ने रियाद में बाकी सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों पर भी हमले किए. प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी हमलों में अमेरिकी विमान निशाना बने, जिनमें एक ई-3 AWACS रडार विमान और ईंधन भरने वाले टैंकर शामिल थे. इस हमले में लगभग एक दर्जन सैनिक घायल हो गए.
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