खाड़ी देशों से होने वाले तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने अब इस समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने के लिए एक नया 'जाल' बुना है. ईरान की ओर से एक आधिकारिक नक्शा जारी किया गया है, जिसमें जहाजों के लिए नए 'सुरक्षित गलियारों' की जानकारी दी गई है. ईरान ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि इस इलाके के पारंपरिक व्यापारिक मार्ग अब सुरक्षित नहीं हैं. नक्शे के जरिए पुष्टि की गई है कि समुद्री रास्तों पर 'नेवल माइन्स' का खतरा है.
अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस इलाके में कम से कम एक दर्जन 'महाम-3' और 'महाम-7' नौसेना माइन्स तैनात की हैं. ये माइन्स पानी के नीचे छिपे ऐसे विस्फोटक हैं जो किसी भी बड़े जहाज को पल भर में तबाह कर सकते हैं.
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सुरक्षित रास्ते के बदले भारी वसूली
ईरानी प्रशासन अब दुनिया भर के जहाजों को इस खतरे से बचने के लिए अपने तट के करीब से गुजरने का निर्देश दे रहा है. हालांकि, यह 'सुरक्षित रास्ता' मुफ्त नहीं है. जानकारी के मुताबिक, ईरान अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को छोड़कर बाकी देशों के जहाजों को सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, लेकिन इसके बदले में 20 लाख डॉलर (करीब 16 करोड़ रुपये) तक का शुल्क (फीस) मांगा जा रहा है.
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ईरान के तट से गुजरना होगा अनिवार्य
नए नक्शे के अनुसार, अब जहाजों को ईरान के समुद्री सीमा के बेहद करीब से गुजरना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर कब्जा करने और मोटी कमाई करने की ईरान की एक सोची-समझी रणनीति है. अगर जहाज इस नए कॉरिडोर का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर समुद्री माइन्स से टकराने का सीधा खतरा बना रहेगा. वैश्विक व्यापार के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है.