Iran Attack on US Base Jordan: मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिका के एक बेहद रणनीतिक और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने पर बड़ा मिसाइल हमला बोल दिया है. इस भीषण हमले में कई अमेरिकी सैनिकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस हमले के दौरान अमेरिकी सेना का सबसे भरोसेमंद माना जाने वाला 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम' और उसके इंटरसेप्टर ईरानी मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह फेल साबित हुए.

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इंटरनेशनल ऑपरेशन्स का मुख्य केंद्र बना निशाना

जॉर्डन में जिस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया है, वह कोई आम ठिकाना नहीं है. यह सैन्य बेस पूरे मिडिल ईस्ट में अंतर्राष्ट्रीय सैन्य अभियानों का मुख्य केंद्र है. यहां से अमेरिका के साथ-साथ उसके नाटो (NATO) सहयोगी देशों के बड़े ऑपरेशन्स संचालित किए जाते हैं. रणनीतिक रूप से यह बेस जॉर्डन की राजधानी अम्मान से लगभग 100 किलोमीटर पूर्व में स्थित है, जहां अमेरिका का बहुत बड़ा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है.

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पैट्रियट सिस्टम क्यों हुआ फेल?

शुरुआती इनपुट्स के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस बेस पर एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे. हमले की रफ्तार और तकनीक इतनी सटीक थी कि अमेरिकी बेस पर तैनात पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें उन्हें हवा में नष्ट करने में नाकाम रहीं और मिसाइलें सीधे बेस के भीतर जाकर गिरीं. सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें इस नाकाम इंटरसेप्शन और जमीन पर हुए धमाकों को देखा जा सकता है.

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क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा

ईरान ने साफ कर दिया है कि यह हमला अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तटीय इलाकों में की गई बमबारी का सीधा जवाब है. जॉर्डन के साथ-साथ कुवैत और बहरीन में भी अमेरिकी ठिकानों के पास अलर्ट जारी किया गया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम का इस तरह फेल होना अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका है और अब इस क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.

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