मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान में गहराए तनाव के बीच चौंकाने वाला सच सामने आया है। नई सैटेलाइट तस्वीरों ने ईरान का असली चेहरा बेनकाब किया है। इन तस्वीरों में ईरान के परमाणु ठिकाने दिख रहे हैं, जिन्हें वह फिर से खड़ा कर रहा है। इसका मतलब यह है कि ईरान ने ही सीजफायर और MoU का उल्लंघन पहले किया है। क्योंकि ईरान एक ओर तो अमेरिका के साथ शांति और परमाणु समझौता कर रहा था। उधर चुपके से अपने परमाणु ठिकानों की मरम्मत करके उन्हें डेवलप कर रहा था। क्योंकि सैटेलाइट तस्वीरों में 2 परमाणु ठिकाने दिखे, जिनके अंदर से गाड़ियों को आते और जाते हुए कैप्चर किया गया है।
परमाणु ठिकानों के अंदर चल रहा काम
‘इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी’ ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। जिसमें स्पष्ट हुआ है कि ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की मरम्मत करके उनमें काम शुरू कर दिया है। यह सच तब सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम और शांति समझौते को खत्म कर चुके हैं। जबकि जून के आखिर में ही अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत 14-सूत्रीय ‘सहमति पत्र’ (MoU) पर ईरान ने हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका को भरोसा दिलाया था कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। ऐसे में नई सैटेलाइट इमेज ट्रंप की पीठ में घोंपा गया छुरा हैं।
पारचिन और पिकैक्स ठिकानों में हलचल
सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के 2 ठिकाने पारचिन और पिकैक्स माउंटेन नजर आ रहे हैं। पारचिन साइट पर परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक पदार्थ रखे जाते हैं। दूसरा है, पिकैक्स माउंटेन जो पहाड़ी इलाका है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बेहद अहम और सीक्रेट ठिकाना है। तस्वीरों में इस पहाड़ के अंदर सुरंग और उसमें से गाड़ियों की आवाजाही नजर आ रही है। इस साल फरवरी में जब इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो इन परमाणु ठिकानों पर बम गिराए गए थे, जिससे इसके चारों तरफ बनी मजबूत कंक्रीट की दीवार ध्वस्त हुई थी, जिसे ईरान ने फिर से बना दिया है, जो ट्रंप को बड़ा झटका है।
मिसाइल स्टोरेज सेंटरों की मरम्मत जारी
सूत्रों के अनुसार, ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों इस्फहान, फोर्डो और नतांज पर हलचल नहीं है, लेकिन ईरान ने मिसाइल स्टोरेज सेंटरों की मरम्मत भी शुरू कर दी है। क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान की मिसाइल क्षमता से टेंशन में रहते हैं। ऐसे में मिसाइल स्टोरेज सेंटरों का फिर से मजबूत होना खतरे की घंटी है। जबकि MoU साइन करते समय ईरान ने स्पष्ट कहा था कि वह परमाणु हथियार न हासिल करेगा और न ही विकसित करेगा। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में संवर्धित यूरेनियम को मैनेज करने पर भी सहमति जताई थी।
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