इजरायल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. स्थानीय पुलिस ने गुरुवार को कहा कि चुनाव की ईमानदारी बनाए रखने के लिए पूरी सतर्कता बरती जाएगी और कथित गड़बड़ी से जुड़ी हर शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी. पुलिस का यह बयान चुनाव में विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच के निर्देश दिए जाने के बाद आया है. इस बीच इजरायल के संसदीय चुनावों के बाद सरकार गठन को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है.
इजरायल में यूनिटी सरकार बनने की अटकलें तेज
वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने के अनुमान के बीच अब राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की संभावना पर चर्चा हो रही है. जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को साथ लाकर सत्ता में बने रहने का रास्ता तलाश रहे हैं. हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां हैं.
क्या है नेतन्याहू का ‘प्लान-B’?
रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के सहयोगी आइजेनकोट को सरकार में शामिल करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो दो संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पहली, सत्ता साझा करने के लिए रोटेशन समझौता किया जाए. इसमें नेतन्याहू शुरुआती दो साल तक प्रधानमंत्री रहें और उसके बाद आइजेनकोट को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए.
दूसरी संभवना में नेतन्याहू पूरे कार्यकाल तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं, जबकि आइजेनकोट को सरकार में कोई अहम मंत्रालय दिया जा सकता है. हालांकि, आइजेनकोट पहले नेतन्याहू के नेतृत्व में काम करने से इनकार कर चुके हैं. ऐसे में इस प्रस्ताव पर सहमति बनना आसान नहीं होगा.
अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर
अरब पार्टियों को अनुमानित 19 सीटें मिलने से उनकी भूमिका भी अहम हो गई है. विपक्षी गुट अगर इन दलों का समर्थन हासिल कर लेता है, तो बहुमत का आंकड़ा पार करना संभव हो सकता है. हालांकि, आइजेनकोट पहले अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर अल्पमत सरकार बनाने से इनकार कर चुके हैं.