Indian Oil Tanker: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत को एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक कामयाबी मिली है. ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने की घोषणा से ठीक कुछ घंटे पहले, भारत के तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकर वहां से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं. इन जहाजों में 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल भरा हुआ है. केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने खुद सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि भारतीय ध्वज वाले तीन क्रूड ऑयल टैंकर— 'देश वैभव', 'देश विभोर' और 'सनमार हेराल्ड' सफलतापूर्वक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं. राहत की बात यह है कि इन जहाजों पर मौजूद सभी 94 भारतीय चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं.
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ईरान की पाबंदी से ऐन पहले निकले जहाज
जानकारों के मुताबिक, यह भारत के लिए एक बेहद करीबी मामला था. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते के बाद हॉर्मुज जलमार्ग को अस्थायी रूप से व्यापार के लिए खोला गया था. इसका फायदा उठाते हुए भारत ने तुरंत अपने जहाजों को रवाना किया. भारतीय जहाजों के गुजरने के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों का हवाला देते हुए इस रूट को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया. अगर भारतीय टैंकर जरा भी लेट होते, तो वे फारस की खाड़ी में ही फंस जाते.
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कब और कहां पहुंचेंगे ये तेल के टैंकर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में यह खेप देश के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है. जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार:
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- देश वैभव: 2.86 लाख टन कच्चा तेल और 37 क्रू मेंबर्स के साथ 24 जून को गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचेगा.
- देश विभोर: 2.88 लाख टन तेल लेकर 24 जून को ही गुजरात के सिक्का पोर्ट पर लंगर डालेगा.
- सनमार हेराल्ड: 2.85 लाख टन क्रूड ऑयल के साथ 1 जुलाई को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर पहुंचेगा.
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में सरकार भारत के समुद्री हितों और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता पर काम कर रही है. हालांकि, भारत के लिए चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, क्योंकि अब भी फारस की खाड़ी में करीब 10 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती है.
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