हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Nana PatekarGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

सिंधु जल संधि अब कभी बहाल नहीं होगी, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा

Indus Water Treaty: संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि अब पुरानी हो चुकी है और इसे दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा. भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने कहा कि आतंकवादियों को पालने वाला देश भारत से किसी दोस्ती या सहयोग की उम्मीद न रखे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के झूठे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया.

विज्ञापन

Indus Water Treaty: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान को बेहद कड़े शब्दों में आईना दिखाया है. भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने वैश्विक मंच से दोटूक कहा कि करीब 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि (IWT) अब पुरानी पड़ चुकी है और इसे किसी भी कीमत पर दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा. उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति बनाने वाला देश भारत से किसी सदाशयता या सहयोग की उम्मीद कतई न करे.
अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जो देश आतंकियों को पनाह देने और उन्हें ट्रेनिंग देने पर गर्व महसूस करता है, उसके साथ कोई भी सहयोग मानवता के खिलाफ होगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज खुद के पाले हुए आतंकियों के राक्षस का शिकार बन रहा है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान हर बार यूएन (UN) में आकर एक ही रोना रोता है, जो कि अब पूरी तरह पुराना और बेअसर हो चुका है.

क्या है सिंधु जल संधि (1960)?

19 सितंबर 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में यह संधि हुई थी. इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी का बंटवारा किया गया:

  • पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज): इनका पूरा नियंत्रण भारत को दिया गया.
  • पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब): इनका पानी पाकिस्तान को मिला, लेकिन भारत को इन पर ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजनाओं के तहत बिजली उत्पादन और सीमित सिंचाई का अधिकार दिया गया.

भारत बदलाव क्यों चाहता है?

भारत का मानना है कि 65 साल पुरानी यह संधि आज के समय और बढ़ती जल जरूरतों के हिसाब से अप्रासंगिक हो चुकी है. मुख्य रूप से दो कारण हैं:

विज्ञापन
  • पाकिस्तान का अड़ंगा: भारत जब भी जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा या रटल जैसी जलविद्युत परियोजनाएं शुरू करता है, पाकिस्तान बिना वजह आपत्ति दर्ज कराकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए चला जाता है.
  • जलवायु परिवर्तन और जरूरत: बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत को अब अपने जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने की जरूरत है, जिसके लिए संधि के नियमों में लचीलापन जरूरी है.

सिंधु नदी तंत्र पर टिकी है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

भारतीय पक्ष ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान की करीब 93 फीसदी पानी की जरूरत और 80 फीसदी कृषि क्षेत्र इसी सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है. ऐसे में किसी भी अधिकार के साथ जवाबदेही का होना जरूरी है, जिससे पाकिस्तान कोसों दूर है. दुनिया बदल चुकी है और कोई भी तकनीकी या कानूनी व्यवस्था हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती.

जम्मू-कश्मीर पर कोई समझौता नहीं

ओआईसी (OIC) और पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया. फर्स्ट सेक्रेटरी ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है, और इस पर कोई बहस नहीं हो सकती. पाकिस्तान एक विफल देश है जो अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करता है. अब केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को खाली कराने का मुद्दा ही बाकी रह गया है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola