मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के चलते तीसरे वर्ल्ड वार की अटकलों को देखते हुए भारत ने अपने एयर डिफेंस को अपग्रेड करने का बड़ा फैसला लिया है. भारत जल्द ही रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी और नई यूनिट्स को लेकर बड़ी डील फाइनल करने जा रहा है. रूस के साथ चल रहे रक्षा सौदों में यह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. इसे भारतीय वायुसेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत एक गेम-चेंजर माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य सीमाओं पर दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को हवा में ही ध्वस्त करना है.
रक्षा खरीद बोर्ड ने सोमवार को भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब यह मामला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास जाएगा, जहां भी इसे स्वीकृति मिलने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार, पांचों नए सिस्टम सीधे खरीदे जाएंगे. रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल की जिम्मेदारी भारतीय निजी कंपनियों को सौंपी जा सकती है.
---विज्ञापन---
S-400 की 3 सबसे बड़ी ताकतें
- S-400 को भारत में सुदर्शन चक्र के नाम से भी जाना जाता है. दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम्स में शुमार S-400 को 'मिसाइलों का काल' कहा जाता है.
- S-400 दुनिया के सबसे उन्नत लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम में से एक है, जो 400 किमी तक दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और हवाई चेतावनी विमानों को ट्रैक व नष्ट कर सकता है.
- S-400 एक बार में 36 लक्ष्यों पर निशाना साधने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के लिए भारत की सीमा में घुसना नामुमकिन हो जाएगा.
S-400 पर ही भरोसा क्यों?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तानी वायु सेना को इंडस नदी के पूर्व में उड़ान भरने से रोक दिया. कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान, जासूसी विमान और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया प्लेटफॉर्म को इंटरसेप्ट कर मार गिराया गया. 10 मई को भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल हमले ने पाकिस्तान के चकलाला एयरबेस और रावलपिंडी के उत्तरी कमांड सेंटर को तबाह कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान ने शांति की गुहार लगाई. S-400 ने इस ऑपरेशन में भारत की हवाई सुरक्षा का मजबूत कवच साबित किया.
---विज्ञापन---
अभी कितने S-400 हैं भारत के पास?
फिलहाल भारत के पास 3 S-400 स्क्वाड्रन तैनात हैं. इस साल के अंत तक मूल 2018 डील के बाकी 2 स्क्वाड्रन भी जुड़ सकते हैं. नई डील से कुल 10 स्क्वाड्रन तक पहुंच जाएगा, जो पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर मजबूत रक्षा प्रदान करेगा. S-400 की नई यूनिट्स आने से लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत की स्थिति और मजबूत हो जाएगी.