संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के झूठे दावों और प्रोपेगैंडा को तार-तार कर दिया. भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया और साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा. इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्र (PoK) को तुरंत खाली करने को कहा. त्यागी ने पाकिस्तान की उस दलील पर कड़ा ऐतराज जताया जिसमें उसने मंदिरों की तुलना शराब की दुकानों से की थी. उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की सोच को दर्शाता है, जहां पूजा स्थल को अपराध के सबूत के तौर पर देखा जाता है. वहां के अल्पसंख्यक इसी नफरत और मानसिकता की कीमत चुका रहे हैं
कश्मीरी पंडितों के पलायन का सच रखा सामने
परिषद में भारत ने 1990 के कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया. त्यागी ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ क्या हुआ था. पाकिस्तान द्वारा हथियारबंद और प्रशिक्षित किए गए आतंकवादियों ने उन्हें अपने ही घरों से बेदखल कर दिया था. उन्हीं आतंकियों ने कश्मीर में हर धर्म के बेगुनाह लोगों को मारा, जिनमें कई मुसलमान भी शामिल थे. विडंबना यह है कि जिस देश ने आतंकियों को पाला-पोसा, वही आज मानवाधिकारों की दुहाई दे रहा है.
अल्पसंख्यकों की स्थिति पर दिखाया आईना
भारत में अल्पसंख्यकों के हालात पर बोलने वाले पाकिस्तान को घेरते हुए त्यागी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में से एक है. यहां अल्पसंख्यक मतदान करते हैं, कानून बनाते हैं, सुप्रीम कोर्ट में जज बनते हैं और शीर्ष संस्थानों का नेतृत्व करते हैं.
इसके उलट, पाकिस्तान में आजादी के बाद से हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय लगातार घटे हैं. वहां मासूम बेटियों का जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह कराया जाता है. ईशनिंदा कानून की आड़ में हर अल्पसंख्यक परिवार खौफ में जी रहा है. यहां तक कि शिया, अहमदी और हजारा जैसे मुस्लिम तबके भी गंभीर उत्पीड़न झेल रहे हैं.
कर्ज चुकाने पर दे ध्यान
भारतीय राजनयिक ने परिषद में बताया कि खुद पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में जून से अब तक कई नागरिक मारे गए हैं और इस्लामाबाद-रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ्तार किया जा रहा है. त्यागी ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान को दूसरों की जमीन पर नजर रखने और आतंकवाद फैलाने के बजाय अपने देश के विकास और उन कर्जों को चुकाने पर ध्यान देना चाहिए, जिन पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी है.
सिंधु जल संधि पर फैलाए जा रहे झूठ को नकारा
दूसरी तरफ, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सिंधु जल संधि को लेकर मध्यस्थता अदालत के तथाकथित फैसले पर पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आदत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठ फैलाने की रही है. यह फैसला किसी वैध स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का नहीं, बल्कि एक अवैध रूप से गठित निकाय का है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता है.