मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अब तक खामोश दिखे यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने अब सक्रिय रूप से जंग में उतरने की तैयारी कर ली है. हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने बीते दिन टीवी कार्यक्रम में जोर देकर कहा, "हम पुष्टि करते हैं कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं." अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जंग में हम ईरान का साथ देंगे. अगर लाल सागर को ईरान या उसके सहयोगियों के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो हूती "सीधे सैन्य हस्तक्षेप" के लिए पूरी तरह तैयार हैं. हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने भी पहले चेतावनी दी थी कि वे 'निष्पक्ष' नहीं हैं. उन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों को "अनुचित" बताया और कहा कि यमन की जनता "वफादारी का बदला वफादारी से" देगी.
लाल सागर में क्यों मचा हड़कंप?
हूतियों के सक्रिय होने से सबसे बड़ा खतरा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर है, जो यमन के नियंत्रण में है. यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है और विश्व व्यापार का लगभग 12% इसी रास्ते से गुजरता है. एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है. पूर्व में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान के लिए चोकपॉइंट की तरह काम करता है, तो ठीक उसी तरह पश्चिम में बाब अल-मंदेब हूतियों के लिए रणनीतिक ताकत है. अगर यह रूट प्रभावित होता है, तो वैश्विक शिपिंग, तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा –खासकर जब होर्मुज पहले से ही तनावपूर्ण है. हूतियों ने पहले गाजा युद्ध के दौरान लाल सागर में इजराइली और संबंधित जहाजों पर हमले करके विश्व व्यापार को प्रभावित किया था. अब ईरान के समर्थन में दोबारा वैसा ही करने की धमकी है.
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सऊदी अरब के लिए 'करो या मरो' की स्थिति
हूतियों का सक्रिय होना सबसे ज्यादा सऊदी अरब और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए खतरे की घंटी है. पिछले 8 सालों से सऊदी अरब हूतियों से जंग लड़ रहा है. हूतियों का युद्ध में सीधे कूदना अब सऊदी अरब को भी इस महासंग्राम में उतरने के लिए मजबूर कर सकता है. जानकारों का मानना है कि इस एक बयान के बाद युद्ध अब और भी भीषण और अनियंत्रित दौर में प्रवेश कर चुका है.
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