hormuz strait us iran clash : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सोमवार को अमेरिकी सेना और ईरान के बीच हुई भीषण गोलीबारी ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. इस घटना के बाद क्षेत्र में चल रहे युद्धविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया है. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज से गुजर रहे दो अमेरिकी झंडे वाले जहाजों को ईरानी हमलों से बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई की गई. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस झड़प में अमेरिका ने ईरान की सात सैन्य नौकाओं को डुबो दिया है. अमेरिका ने इसे जहाजों की सुरक्षा के लिए की गई कार्रवाई बताया है.

ईरान का पलटवार और तेल संकट

अमेरिका के दावों के बीच ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है. जवाबी कार्रवाई में यूएई (UAE) के फुजैरा स्थित तेल संयंत्रों पर हमला किया गया. यूएई के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से 12 बैलिस्टिक मिसाइलें, 3 क्रूज मिसाइलें और 4 ड्रोन दागे गए. हालांकि, यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें हवा में ही मार गिराने का दावा किया है. यूएई ने इसे युद्ध की शुरुआत का संकेत बताते हुए कहा है कि वह अब जवाबी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है.

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बाजार में मची उथल-पुथल

इस टकराव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर दिखने लगा है. खाड़ी में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 5% का उछाल आया है और यह 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार 'डाउ जोन्स' 2% तक लुढ़क गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है.

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बातचीत या विनाशकारी परिणाम?

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन हमलों से साफ इनकार किया है. उन्होंने अमेरिका पर 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के नाम पर उकसाने वाली कार्रवाई का आरोप लगाते हुए इसे 'प्रोजेक्ट डेडलॉक' करार दिया. अरागची ने चेतावनी दी कि होर्मुज संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और किसी भी हस्तक्षेप के नतीजे बेहद विनाशकारी होंगे. उन्होंने बातचीत पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका और यूएई को इस 'दलदल' में फंसने से बचना चाहिए. फिलहाल पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

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