मिडिल ईस्ट में जारी 'महासंग्राम' के बीच ईरान और इजराल-अमेरिका में सिर्फ मिसाइल हमले ही नहीं हो रहे, बल्कि जुबानी हमले भी लगातार जारी हैं. ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने शनिवार को अपने पड़ोसी देशों पर हमला करने के लिए उनसे माफी मांगी. हालांकि इसके कुछ घंटे बाद ही ईरान ने चेतावनी भी दे डाली, जिसे लेकर अब तेहरान सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं. राष्ट्रपति पेजेश्कियन के कार्यालय के उप प्रमुख ने कहा कि अगर पड़ोसी देश अमेरिका-इजरायल का नहीं देंगे तो उन पर हमले नहीं होंगे.

'अमेरिका का साथ दिया तो…'


अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'क्षेत्र के देश अगर अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करेंगे, तो हम उन पर हमला नहीं करेंगे'. यह बयान अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियानों के बाद खाड़ी देशों से माफी मांगने के कुछ घंटों बाद आया. उधर, ईरानी सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेखार्ची ने चेतावनी को और सख्त कर दिया. उन्होंने घोषणा की कि ईरान के खिलाफ हमला शुरू करने वाले किसी भी स्थान या देश को वैध निशाना माना जाएगा.

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ब्रिगेडियर जनरल ने खास तौर पर पश्चिम एशिया के देशों को आगाह किया गया कि अमेरिका या इजरायल को अपने सैन्य ठिकाने, हवाई क्षेत्र या अन्य सुविधाएं ईरान पर हमलों के लिए उपलब्ध कराने वाले देशों को निशाने पर लिया जाएगा. शेखार्ची ने कहा, 'जो देश अपनी जमीन का दुरुपयोग नहीं होने देंगे, वे सुरक्षित रहेंगे क्योंकि ईरान पड़ोसी धर्म का पालन करेगा.'

डोनाल्ड ट्रंप के बयान का जवाब


आपको बता दें के ईरान की माफी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को मिडिल ईस्ट का हारा हुआ देश बताया. ट्रंप के बयान के बाद अब ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट की है कि माफी से संबंध सुधारने का प्रयास किया गया, लेकिन दुश्मनी का बदला भी लिया जाएगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेहरान पड़ोसी देशों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है. इधर, दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले और लेबनान में इजरायली कार्रवाइयों ने तनाव बढ़ा दिया है.

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