अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक बाजारों में तेल की कमी को दूर करने के लिए अपने आपातकालीन भंडार का दरवाजा खोल दिया है. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सदस्य देशों ने बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में स्टॉक रिलीज करने का फैसला किया है. इस प्रस्तावित रिलीज में लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल का होगा और बाकी 28 प्रतिशत तेल उत्पादों का रहेगा. सरकारों ने उद्योगों के अनिवार्य भंडार से 116.6 मिलियन बैरल और अपने निजी भंडार से 271.7 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाई जा सके.

क्षेत्रवार तेल आपूर्ति का मास्टर प्लान

IEA के मुताबिक अमेरिका महाद्वीप के सदस्य देश अकेले 172.2 मिलियन बैरल तेल बाजार में लाएंगे जिससे सप्लाई चैन को मजबूती मिलेगी. एशिया-ओशिनिया क्षेत्र के देशों ने अपने भंडार से तुरंत तेल उपलब्ध कराने की बात कही है जबकि यूरोप और अमेरिका से यह आपूर्ति मार्च के अंत तक शुरू हो पाएगी. एजेंसी का मानना है कि इस कदम से न केवल तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी बल्कि युद्ध की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता भी कम होगी. इस बड़े फैसले से उन देशों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं.

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हमले के बीच फुजैरा से सुरक्षित निकला भारतीय टैंकर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर 'जग लाडकी' सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हो गया है. सरकार ने जानकारी दी है कि 14 मार्च 2026 को जब यह जहाज फुजैरा पोर्ट पर तेल की लोडिंग कर रहा था उसी समय वहां टर्मिनल पर हमला हुआ था. इस खतरनाक स्थिति के बावजूद जहाज ने बिना किसी नुकसान के तेल भरने की प्रक्रिया पूरी की और अपनी मंजिल की ओर बढ़ गया. यह युद्ध प्रभावित इलाके से सुरक्षित निकलने वाला चौथा भारतीय जहाज है जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत मिली है.

भारतीय नाविक सुरक्षित और सप्लाई जारी

टैंकर 'जग लाडकी' लगभग 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर फुजैरा से रवाना हुआ. जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारत सरकार समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है. पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात के बीच ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार ने साफ किया है कि समुद्री रास्तों में चुनौतियों के बावजूद भारतीय जहाजों की सुरक्षा और तेल की लोडिंग को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो.