मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है. यह उछाल ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने और खाड़ी क्षेत्र के एनर्जी इंफ्रा पर किए गए हमलों की वजह से आया है. इसके अलावा खाड़ी में बढ़ते तनाव के साथ, यूक्रेनी सेना ने चल रहे युद्ध के हिस्से के रूप में रूस में कम से कम दो रिफाइनरियों और एक तेल-लोडिंग बंदरगाह पर हमला किया है.वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में, पोर्ट आर्थर, टेक्सास में विशाल वैलेरो रिफाइनरी में विस्फोट और आग लगने के बाद उसे बंद कर दिया गया.
इन घटनाओं ने ईरान युद्ध की वजह से पैदा हुई बाधाओं के साथ मिलकर ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला दिया है. ट्रंप ने जब ईरानी एनर्जी इंफ्रा पर हमले टालने का ऐलान किया, उसके बाद तेल की कीमतों में 11% की थोड़ी सी गिरावट आई थी, लेकिन अब वे फिर से $100 के ऊपर पहुंच गई हैं. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस स्थिति को 'इतिहास का सबसे बड़ा तेल व्यवधान' बताया है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें : Iran Israel War: मिडिल ईस्ट युद्ध को लेकर भारत के नजरिए पर क्या बोले इजरायली राजदूत रूवेन अजार?
---विज्ञापन---
ईरान युद्ध में 18 से 20 मार्च के बीच फारस की खाड़ी के एनर्जी सेंटरों पर हमले हुए. इजरायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र पर हमला किया, जिससे पूरे क्षेत्र में जवाबी हमले शुरू हो गए. कतर एनर्जी ने 19 मार्च को ईरानी मिसाइल हमलों के बाद दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी कॉम्प्लेक्स, रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में नुकसान की जानकारी मिली. उसी दिन सऊदी अरब की 'SAMREF' रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला हुआ. कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की 'मीना अल-अहमदी' और 'मीना अब्दुल्ला' रिफाइनरियों में भी आग लग गई.
वहीं, पूर्वी यूरोप में, 21 मार्च को यूक्रेनी सेना ने रोसनेफ्ट की 'सार्तोव' रिफाइनरी पर हमला किया. 23 मार्च को बाल्टिक सागर के 'प्रिमोर्स्क' तेल टर्मिनल और 'उफा' की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया गया.
यह भी पढ़ें : कौन हैं मोहम्मद बागेर जोलकाद्र? ईरान ने लारीजानी की मौत के बाद बनाया नया सिक्योरिटी चीफ
इसके अलावा 23 मार्च को टेक्सास के पोर्ट आर्थर में वैलेरो रिफाइनरी में विस्फोट और आग लग गई. यह रिफाइनरी रोजाना करीब 4,35,000 बैरल तेल प्रोसेस कर सकती है. हालांकि, यह हादसा युद्ध से संबंधित नहीं था.
बता दें, इन घटनाओं की वजह से भारत जैसे कई देशों में एनर्जी क्राइसिस पैदा हो गए. पीएम मोदी ने संसद में कहा है कि इसका असर लंबे समय तक रहेगा. साथ ही कहा कि लंबे समय तक पड़ने वाले असर के लिए तैयार रहना चाहिए.