हिमालयी क्षेत्र तिब्बत में ग्लेशियर फटने आज नेपाल में भारी तबाही मची है. सुबह करीब 9 बजे अचानक ग्लेशियर फटा और भारी मात्रा में पानी के साथ मलबा आया. जिसने नेपाल की चीन सीमा से लगे रसुवा इलाके में तबाही मचाई. मलबे और पानी में रसुवा के टिमुरे, स्याफ्रूबेसी आस-पास के इलाकों में करीब 1000 लोगों के बहने की खबर है. हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सरकार का करोड़ों का नुकसान हुआ है. नेपाल सरकार ने पुलिस, सेना और राहत टीमों को फील्ड में उतारकर बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं.
त्रिशूली नदी में बाढ़ आने से तबाही मची
नेपाल पुलिस के X हैंडल पर वायरल वीडियाे के अनुसार, ग्लेशियर भोटे कोशी नदी में फटा है, जो तिब्बत से निकलती है और आगे त्रिशूली नदी में मिल जाती है, जिसका पानी भारत की गंडक नदी में भी आता है. इसी नदी में ऊपर से भरभरा कर पानी आया, जो लोगों को बहा ले गया. रसुवा जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने बाढ़ में बहने वाले लोगों की संख्या की पुष्टि नहीं कि, लेकिन गांवों और रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचने की बात कही है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह खुद घटनाक्रम पर नजर रखे हैं और सीधे राहत-बचाव टीमों के साथ पुलिस-सेना को भी निर्देश दे रहे हैं.
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लोगों को ऊंचे इलाकों में जाने का निर्देश
रसुवा जिला प्रशासक नरेंद्र परियार ने बताया कि ग्लेशयिर फटने से आई बाढ़ ने स्याफ्रूबेसी और टिमुरे गांव को अपनी चपेट में लिया है. यह दोनों गांव चीन-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी के आस-पास बसे हैं. बालेन शाह सरकार ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दे दिया है. नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी ऊंचाई वाले इलाकों में जाने का कहा है. क्योंकि अचानक आई प्राकृतिक आपदा से निपटने में सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाका और पानी का तेज बहाव है. पानी उतरेगा, उसके बाद ही जानी नुकसान की तस्वीर साफ होगी.
पिछले साल भी आई थी विनाशकारी बाढ़
बता दें कि भोटे कोशी नदी में पिछले साल भी विनाशकारी बाढ़ आई थी. जिसमें 9 लोगों ने जान गंवाई थी और 25 लोग लापता हो गए थे, जिनका आज तक सुराग नहीं लगा. बाढ़ ने नेपाल और चीन को जोड़ने वाले फ्रेंडशिप ब्रिज को भी ध्वस्त कर दिया था. इस वजह से दोनों देशों के बीच ट्रांसपोर्ट और बिजनेस कई महीनों तक बंद रहा था. पिछले साल भोटे कोशी नदी में जो बाढ़ आई थी, वह तिब्बत की सुप्राग्लेशियल झील में ग्लेशियर फटने से आई थी.
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