मिडिल ईस्ट जंग के बीच एक 52 साल पुरानी अमेरिकी तस्वीर चर्चा में है, जिसका कनेक्शन तेल-गैस संकट से बताया जा रहा है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक बार फिर 5 दशक पुराने ऊर्जा संकट की याद दिला दी है. दरअसल, सोशल मीडिया पर अमेरिका के एक पुराने फिलिंग स्टेशन की तस्वीर वायरल हो रही है, जिस पर लिखा है कि ग्राहकों को केवल 10 गैलन गैस ही मिलेगी. यह तस्वीर 1970 के दशक के उस दौर की है जब खाड़ी देशों में युद्ध के कारण तेल की भारी किल्लत हो गई थी. आज के हालात भी कुछ वैसे ही नजर आ रहे हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकट 1970 के तेल झटकों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.

1970 के दशक का इतिहास और आज की स्थिति

इतिहास गवाह है कि जब भी खाड़ी देशों में युद्ध हुआ है, दुनिया ने तेल का संकट झेला है. पहला बड़ा झटका 1973 में 'योम किप्पुर युद्ध' के दौरान लगा था, जब तेल की कीमतें 3 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो गई थीं. दूसरा झटका 1979 की ईरानी क्रांति के समय लगा, जिससे तेल 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. आज की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से करीब 1.1 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई रुक गई है. यह कमी पिछले दोनों ऐतिहासिक संकटों के कुल योग से भी अधिक है और इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ रहा है.

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हॉर्मुज की नाकाबंदी और आर्थिक खतरा

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है और इसकी नाकाबंदी ने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी है. केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और हीलियम जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई भी ठप हो गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज की सप्लाई चेन 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर आधारित है, जिसका मतलब है कि देशों के पास ज्यादा स्टॉक रखने की सुविधा नहीं है. ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमले जारी रहे तो वह आईटी और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा, जिससे संकट और गहरा सकता है.

संकट से निपटने की तैयारी

इस भयावह स्थिति को देखते हुए IEA ने सदस्य देशों से अपने इमरजेंसी स्टॉक का 20 प्रतिशत हिस्सा बाजार में उतारने को कहा है. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह केवल कुछ समय की राहत है, कोई स्थाई समाधान नहीं है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे ऊर्जा की खपत कम करें, वर्क फ्रॉम होम अपनाएं और गैर-जरूरी यात्राओं से बचें. फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बयानों का दौर जारी है और दुनिया 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है. अगर जल्द ही युद्धविराम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती हैं.