Groundwater Crisis: इंसान की एक बड़ी लापरवाही और मौसम के बदलते मिजाज ने धरती की कोख को इस कदर खोखला कर दिया है कि अब उपजाऊ जमीन ही पाताल लोक में समाने लगी है. यह कोई डरावनी काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि तुर्किये (टर्की) की आंखों देखी हकीकत है. तुर्किये के मध्य इलाके में स्थित 'कोन्या प्लेन' को देश की 'अनाज की टोकरी' कहा जाता है. पूरे देश की 36% गेहूं और 35% चुकंदर की जरूरत अकेले इसी इलाके से पूरी होती है. लेकिन आज यहां के किसान खौफ के साए में जी रहे हैं क्योंकि उनके लहलहाते खेत रातों-रात गायब हो रहे हैं.
---विज्ञापन---
रातों-रात गायब हो रहे हैं खेत
ताजा वैज्ञानिक आंकड़ों और सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में अब तक 684 से ज्यादा विशालकाय सिंकहोल (जिन्हें स्थानीय भाषा में ओब्रुक कहा जाता है) बन चुके हैं और यह आंकड़ा तेजी से 700 के पार पहुंच रहा है. ड्रोन से ली गई तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं, जहां खेतों के बीचों-बीच सैकड़ों फीट गहरे और 100 फीट से ज्यादा चौड़े कुएं जैसे खौफनाक गड्ढे नजर आ रहे हैं. कई गड्ढे तो 30-30 मंजिला इमारतों जितने गहरे हैं, जो अचानक पूरी फसल को अपने अंदर निगल लेते हैं.
---विज्ञापन---
चट्टानों का घुलना और नासा की चेतावनी
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, कोन्या का यह इलाका चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की चट्टानों वाला क्षेत्र है. जब लंबे समय तक सूखा पड़ता है और किसान फसलों के लिए जमीन के नीचे से अंधाधुंध पानी (भूजल) खींचते हैं, तो पानी का स्तर अत्यधिक नीचे गिर जाता है. इसके बाद जमीन के अंदर की चट्टानें खोखली हो जाती हैं और ऊपर की भारी मिट्टी अपना सहारा खोकर अचानक भरभराकर नीचे धंस जाती है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने भी आगाह किया है कि तुर्किये में पानी के जलाशय पिछले 15 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं.
---विज्ञापन---
अमेरिका और भारत के लिए भी खतरे की घंटी
यह जानलेवा संकट सिर्फ तुर्किये तक सीमित नहीं है. अमेरिका के बड़े कृषि क्षेत्रों और भारत के पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में भी भूजल का दोहन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पानी की हर बूंद को बचाने और फसलों के पैटर्न को बदलने पर तुरंत काम नहीं किया गया, तो भविष्य में भारत और अमेरिका के खेतों में भी ऐसे ही आत्मघाती सिंकहोल देखने को मिल सकते हैं. प्रकृति का यह साफ संदेश है- अगर हम समय रहते नहीं संभले, तो अन्न उपजाने वाली यह धरती ही इंसानी बस्तियों को निगलना शुरू कर देगी.
---विज्ञापन---