मिडिल ईस्ट में ईरान और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गहराए संकट के बीच अमेरिका ने भारत को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने रूस से अब सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर पाबंदी लगा दी है। होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से सप्लाई बाधित हुई थी। रूस के कई जहाज समुद्र में फंस गए थे। राहत देते हुए अमेरिका ने भारत को अनुमति दी थी कि वह 30 दिन तक रूस का समुद्र में फंसा कच्चा तेल खरीद सकता हैं, लेकिन यह समयसीमा 11 अप्रैल को खत्म हो गई और अब खरीद पर रोक लगा दी गई है।

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भारत समेत कई एशियाई देशों के लिए टेंशन बढ़ी

बता दें कि अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ताजा फैसले ने भारत समेत कई एशियाई देशों को टेंशन में डाल दिया है। क्योंकि जंग के कारण होर्मुज ब्लॉक है तो ईरान से कच्चा तेल नहीं मिल रहा। वहीं अब रूस से आयात बंद होने से भारत को खाड़ी के अन्य देशों से तेल खरीदना पड़ेगा या अमेरिका के घरेलू बाजार पर निर्भरता बढ़ानी होगी। यह दोनों ही रास्ते महंगे हैं। वहीं तेल-गैस की सप्लाई कम होने से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और इनके रेट बढ़ाने पड़ सकते हैं।

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छूट मिलने पर भारत ने 3 करोड़ बैरल तेल खरीदा

अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट की सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीद में छूट की समयसीमा नहीं बढ़ाने की घोषणा की। भारत ने छूट का काफी फायदा उठाया है। अमेरिका से समझौते के अनुसार भारत की रिफाइनरियों ने रूस की तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल से किनारा कर लिया था। लेकिन तेल खरीद की छूट मिलने के बाद भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल खरीदा। भारत समेत कई एशियाई देशों ने अमेरिका से छूटों को बढ़ाने की अपील की थी, जिसे ठुकरा दिया गया।

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युद्ध के कारण दुनिया में कच्चे तेल का संकट गहराया

28 फरवरी को अमेरिका और ईरान का युद्ध छिड़ने के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई थीं। इस वजह से दुनिया में तेल का संकट गहराने लगा था। राहत देने के लिए 12 मार्च को भारत को रूस का समुद्र में फंसा कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष छूट मिली। ईरान से तेल खरीद के लिए भी 30 दिन का लाइसेंस दिया था। लेकिन रूस के लिए मिली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई, जबकि ईरान के लिए मिली छूट 19 को खत्म होगी।

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