अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक चौंकाने वाला सच सामने आया है. जुलाई महीने में जब राष्ट्रपति ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन के लिए तुर्किये गए थे तो खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि ईरान ने उनकी हत्या की साजिश रची है. इस रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए थे कि पूरी दुनिया को चकमा दे दिया गया. राष्ट्रपति ट्रंप को नाटो शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद तुर्किये से ब्रिटेन जाना था. लेकिन उन्हें बेहद रहस्यमयी तरीके से तुर्किये से निकालकर सुरक्षित ब्रिटेन पहुंचाया गया था और यह कमाल उनकी सीक्रेट सर्विस ने किया था.

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34 दिन बाद घटनाक्रम का खुलासा किया गया

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, घटना 8 जुलाई की है, लेकिन उस दिन जो कुछ हुआ, उसका खुलासा 34 दिन बात सीक्रेट सर्विस ने किया. पता चला है कि राष्ट्रपति ट्रंप जब अमेरिका से तुर्किये आने के लिए निकले तो वे अपने नए ऑफिशियल एयरफोर्स-1 बोइंग 747-8 विमान में नहीं थे, जबकि पूरी दुनिया को लगा वे अपने नए विमान में हैं. वे अपने पुराने एयरफोर्स-1 बोइंग-747 में तुर्किये पहुंचे थे. तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए वे पुराने एयरफोर्स-1 में ही चढ़े थे, ऐसा होते हुए पूरी दुनिया ने देखा और इसके वीडियो भी सामने आए थे.

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बड़े से छोटे से बड़े विमान में शिफ्ट हुए थे ट्रंप

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप चढ़े तो पुराने एयरफोर्स-1 बोइंग-747 में थे, लेकिन उस विमान से भी वे कैटरिंग ट्रक में बिठाकर दूसरे छोटे विमान तक ले जाए गए थे. जी हां, राष्ट्रपति ट्रंप छोटे से विमान C-32A में तुर्किये से ब्रिटेन गए थे. वे विमान में चढ़े और वहां से एक विशेष सूट पहनकर कैटरिंग ट्रक में चढ़े और एयरफोर्स वन के बगल में खड़े छोटे एयरफोर्स सी-32 विमान तक गए. वहां सीक्रेट तरीक से उन्हें ट्रक से उतार गया और छोटे विमान में बिठाया गया और फिर नए एयरफोर्स-वन में चढ़ा दिया गया.

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ईरान ने रची थी ट्रंप की हत्या करने की साजिश

बता दें कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या करने की साजिश रची थी. अली खामेनेई के जनाजे में भी 'ट्रंप की हत्या करके बदला लेंगे, मौत का बदला मौत से लेंगे' के नारे लगे थे. अब से पहले ईरान सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए भी ट्रंप की हत्या की साजिश रच चुका था. अब ईरान ने पूर्व सुप्रीम लीडर अली खोमेनेई की हत्या का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की साजिश रची. ऐसी जानकारी इजरायल की खुफिया एजेंसियों के हवाले से आई थी, जिसकी पुष्टि तो नहीं हुई थी, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप की सुरक्षा के इंतजाम और कड़े किए थे.

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