अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी पीठ थपथपाई है और खुद को हीरो बताया है, जिसने पूरी दुनिया को आतंकवाद के स्पॉन्सर देश से बचाया है. जी हां, मिडटर्म इलेक्शन की वोटिंग से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनावी रैली में नाम लिए बिना ईरान पर निशाना साधा और कहा कि मैंने अपने देश को दुनिया के सबसे बड़े ‘आतंक को स्पॉन्सर करने वाले देश से बचाया है. वे 1979 से ही हम पर हमले कर रहे हैं. मेरे पहले कार्यकाल में हमने जनरल सुलेमानी को मार गिराया. वह सड़क किनारे लगाए जाने वाले बमों (IED) का जनक था. लेकिन उसका बदला अमेरिका से लिया जा रहा है.
नाम लिए बिना ईरान के हालात बयां किए
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हमलों की शुरुआत उन्होंने की थी, हमने नहीं. लेकिन अब हम उस शुरुआत को खत्म कर रहे हैं. हम उन्हें बुरी तरह पीट रहे हैं. उनके पास कोई नौसेना नहीं है. उनके विमान ईरान के रनवे पर इधर-उधर बिखरे पड़े हैं. उनके पास कोई रडार नहीं है. उनके पास विमान-रोधी हथियार नहीं हैं. उनके पास कोई नेता नहीं है और न ही उनके पास बात करने के लिए कोई बचा है. इसलिए अब तक समझौता नहीं हो पाया है, लेकिन इतना तय है कि उन्हें किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, अब इसके लिए चाहे जो खामियाजा भुगतना पड़े, चाहे मेरी कुर्सी ही क्यों न चली जाए.
3 नवंबर को होगी मिडटर्म इलेक्शन वोटिंग
बता दें कि अमेरिका में कल 3 नवंबर को मिडटर्म इलेक्शन वोटिंग होगी. इसके जरिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के 435 और सीनेट के 35 सदस्य चुने जाएंगे. मिडटर्म इलेक्शन राष्ट्रपति के कार्यकाल के पहले 2 साल के बाद कराए जाते हैं, जो राष्ट्रपति के अगले 2 साल के कार्यकाल का ट्रैक तैयार करेंगे कि वे खुलकर फैसले ले पाएंगे या उनके कामकाज पर संसद का अंकुश लग जाएगा. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मिडटर्म इलेक्शन में जनता राष्ट्रपति के 2 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी. वर्तमान में हाउस में रिप्रेजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी की 218 और डेमोक्रेट्स की 214 सीटें हैं. सीनेट में रिपब्लिकन की 53 और डेमोक्रेट्स की 47 सीटें हैं. अगर संसद पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हुआ तो ट्रंप मुश्किल में पड़ेंगे.
इलेक्शन के बाद ईरान पर हो सकता हमला
बता दें कि मिडटर्म इलेक्शन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर हमला करने के आदेश दे सकते हैं. पिछले कई दिन से अमेरिका की सेना हमले की तैयारी कर रही है और मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सेना हथियारों और युद्धपोतों के साथ तैनात हो चुकी है. राष्ट्रपति ट्रंप मीडिया को भी कह चुके हैं कि वे इस बार ईरान के साथ निर्णायक जंग लड़ेंगे. हालांकि वे मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए भड़क गए और कहा कि क्या मैं पूरी दुनिया को बताकर हमला करुंगा? लेकिन उन्होंने साफ-साफ संकेत दे दिए हैं कि ईरान के साथ अब बातचीत करने का मतलब नहीं है और न ही वे ईरान की शर्तों पर समझौता करना चाहते हैं, इसलिए वे अब युद्ध को खत्म करेंगे और ईरान का करना क्या है, वे खुद इसका फैसला लेंगे.
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