अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाकात फिलहाल टल गई है. राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि इस महीने के अंत में होने वाला उनका प्रस्तावित चीन दौरा अभी के लिए स्थगित कर दिया गया है. ट्रंप ने इसके पीछे ईरान के साथ चल रहे मौजूदा तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों को मुख्य कारण बताया है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि देरी का मतलब रिश्तों में खटास नहीं है.
उन्होंने कहा कि चीन के साथ हमारे कामकाजी रिश्ते बहुत अच्छे हैं. हम यह दौरा रद्द नहीं कर रहे, बल्कि इसे लगभग पांच या छह हफ्तों के लिए आगे बढ़ा रहे हैं. मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं और मुझे यकीन है कि वह भी मेरा इंतजार कर रहे हैं.
---विज्ञापन---
मदद की शर्त और चीन का पलटवार
इस दौरे को लेकर सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर खड़ा हुआ. ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि उनका चीन जाना इस बात पर निर्भर करेगा कि बीजिंग वॉशिंगटन को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खुलवाने में मदद करता है या नहीं. हालांकि, चीन ने इस शर्त को सिरे से खारिज कर दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सख्त लहजे में कहा कि इस दौरे का होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है.
---विज्ञापन---
NATO सहयोगियों पर बरसे ट्रंप
सिर्फ चीन ही नहीं, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर नाटो देशों और अन्य पुराने सहयोगियों को भी आड़े हाथों लिया. ट्रंप ने दावा किया कि अधिकतर नाटो सहयोगियों ने होर्मुज की सुरक्षा में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया है. सहयोगी देश ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते. ट्रंप का मानना है कि अब उन्हें किसी की सहायता की जरूरत नहीं है क्योंकि ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही 'ध्वस्त' हो चुकी है.